बाल विवाह हो जाने के बाद भी करवा सकते है शून्य या निरस्त- डॉ. पंड्या
(गायत्री संस्थान 12 मई पीपल पूर्णिमा तक जिले में चलाएगा विशेष अभियान, बाल विवाह की सूचना साझा करने वाले को 1100₹ का पुरस्कार)
प्रतापगढ़ | अक्षय तृतीया पर बाल विवाह की सम्भावना को देखते हुए भारत सरकार द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस, जिला प्रशासन प्रतापगढ़ , पुलिस विभाग, बाल अधिकारिता विभाग एवं गायत्री सेवा संस्थान, उदयपुर के संयुक्त प्रयास से कुल 3 बाल विवाह को रोकने के साथ जनप्रतिनिधियों, धर्म गुरूओ एवं समाज के जागरूक लोगो से बाल विवाह न करवाने के साथ सहयोग न करने की शपथ करवाई जा रही है |
इस अवसर पर बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं पूर्व सदस्य राजस्थान बाल आयोग, राजस्थान सरकार डॉ. शैलेन्द्र पंड्या ने जानकारी देते हुए बताया की बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 अंतर्गत बाल विवाह करना ही नहीं बाल विवाह में सहयोगी होना भी अपराध हैं | बाल विवाह में यदि आप ढोली, पंडित, मौलवी, हलवाई या किसी प्रकार की सेवा उपलब्ध करवा रहे है तब भी अपराध हैं| जिन बच्चों का पूर्व में बाल विवाह हो चुका है और वे इस बंधन से मुक्त होना चाहते है तब भी ये अधिनियम उन्हें बालिग होने के 2 वर्ष तक बाल विवाह को शून्य करवाने की शक्ति प्रदान करता हैl
इस अवसर पर जिले के सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग टी. आर आमेटा ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार द्वारा एस.ओ.पी जारी कर सभी विभागों की जवाबदेही बाल विवाह रोकने हेतु तय की गई है l विभाग स्थानीय स्वयं सेवी संगठन गायत्री सेवा संस्थान के साथ मिलकर जन जागरूकता करने के साथ अलर्ट मोड पर कार्यरत है l
जिला प्रभारी रामचन्द्र मेघवाल ने बताया कि संस्थान जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलाएंस एवं प्रशासन के निर्देशन में अब तक 3 बाल विवाह रोकने के साथ 600 से ज़्यादा लोगो से बाल विवाह नहीं करवाने का संकल्प करवा चुका है l विशेष जागरूकता अभियान आगामी पीपल पूर्णिमा 12 मई तक चलेगा l कोई भी आमजन चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 या इस हेतु जारी नम्बर 9001841098 पर कॉल कर बाल विवाह की सूचना साझा कर सकते है उनकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी l
