जनगणना – 2027 मकान सूचीकरण जनगणना का महत्त्वपूर्ण कार्य – एडीएम

उदयपुर, 18 फरवरी। जिला परिषद सभागार में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के लिए आयोजित किये जा रहे नियमित सहायकों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण बुधवार को संपन्न हुआ। जनगणना कार्य निदेशालय, राजस्थान, जयपुर से नियुक्त राज्य स्तरीय प्रशिक्षक महेन्द्र कुमार मीणा एवं द्विपेन्द्र धाभाई ने प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के प्रथम दो दिवस में मकानसूचीकरण एवं मकान गणना का विस्तृत सैद्धान्तिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया और प्रशिक्षण के तृतीय एवं अन्तिम दिवस को उक्त समस्त कार्याें का परीक्षण समस्त सम्भागियों द्वारा स्वयं एचएलबीसी पोर्टल पर करते हुए व्यवहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया गया। परीक्षण उपरान्त समस्त सम्भागियों का ऑनलाईन टेस्ट के माध्यम से मूल्यांकन भी किया गया। यह जनगणना पेपरलेस होकर पूर्णतया डिजीटल माध्यम से होगी जिसमें कि 1 मई 2026 से 15 मई 2026 तक आमजन भी स्वगणना विकल्प का उपयोग करके अपनी गणना कर सकेंगे।

प्रशिक्षण के समापन सत्र में अतिरिक्त जिला कलक्टर (शहर) जितेन्द्र ओझा ने मकानसूचीकरण ब्लॉक जनगणना कार्य की प्रारम्भिक एवं आवश्यक महत्त्वपूर्ण सूचनाओं एवं रखी जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया गया। एक जनगणना ब्लॉक में 700 से 800 की जनसंख्या अथवा 150 से 180 मकान होंगे। मकानसूचीकरण के कार्य को सम्पादित करवाये जाने हेतु नियमित सहायकों की भूमिका एवं उत्तरदायित्त्व महत्त्वपूर्ण है। नियमित सहायकों द्वारा सेटेलाईट चित्रों के माध्यम से प्रगणक ब्लॉकों के नक्शे बनाये जायेंगे जोकि आगामी जनगणना में प्रगणक एवं पर्यवेक्षक को जनगणना ब्लॉकों के भौतिक सत्यापन, मकानसूचीकरण एवं जनगणना हेतु सहायक सिद्ध होंगे। प्रशिक्षण में जिले के समस्त ग्रामीण चार्जों (तहसीलों) से 17, शहरी चार्जों (नगर निगम एवं नगर पालिका) से 06 एवं जिला स्तर से 04 नियमित सहायक उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण में जनगणना 2027 के नोडल विभाग आर्थिक एवं सांख्यिकी, उदयपुर के उप जिला जनगणना जनगणना अधिकारी पुनीत शर्मा ने बताया कि यह पारंपरिक पेपर-आधारित विधियों से पूर्णतः डिजिटल ढांचे की ओर एक ऐतिहासिक बदलाव है, जो सरकार की न्यूनतम सरकार, अधिकतम -शासन की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। जनगणना 2027 केवल एक सांख्यिकीय अभ्यास नहीं है; यह भारत के भविष्य की नीति-निर्धारण की रीढ़ है। हमारा लक्ष्य सेवा के रूप में जनगणना स्थापित करना है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि देश की विकास यात्रा में कोई भी नागरिक पीछे न छूटे। ज़मीनी स्तर पर डिजिटल दक्षता ही सफलता की कुंजी है। सहायक निदेशक, सांख्यिकी विभाग राजेन्द्र खटीक ने डेटा अखंडता और गोपनीयता और वास्तविक समय की ट्रैकिंग के लिए जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) पोर्टल के महत्व और जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत नागरिक डेटा की पूर्ण गोपनीयता सुनिश्चित रखने हेतु जानकारी प्रदान की गई।

By Udaipurviews

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