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राजस्थान का वेल्लोर भैंसरोडगढ़ दुर्ग

राजस्थान का वेल्लोर भैंसरोडगढ़ दुर्ग

राजस्थान का वेल्लोर भैंसरोडगढ़ दुर्ग चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा कस्बे से 7 किलोमीटर दूर अरावली पर्वतमाला की एक विशाल घाटी के मध्य पर्वत शिखर के अंतिम छोर पर स्थित है। चंबल और बामणी नदियों के संगम स्थल पर बसा यह दुर्ग तीन ओर से वर्ष पर्यंत वृहद जलराशि से आप्लावित रहता है। इस दुर्ग को तीन तरफ से सुरक्षित और दुर्जेय बना दिया है। केवल उत्तर में, निकटवर्ती पहाड़ी से इस दुर्ग पर आक्रमण कर उसे जीतना संभव था। यह एक अभेद्य विकट दुर्ग है जो जलदुर्ग की श्रेणी में आता है। नैसर्गिक सुरक्षा कवच युक्त इस दुर्ग का प्राकृतिक…
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सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मारवाड़ का सीमावर्ती सोजत का किला

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मारवाड़ का सीमावर्ती सोजत का किला

सोजत का किला मारवाड़ का सीमावर्ती दुर्ग है जो जोधपुर से 110 कि.मी. दूर पाली जिले के सोजत कस्बे में सुकड़ी नदी के मुहाने पर अवस्थित है। मारवाड़ और मेवाड़ के मध्य स्थित होने के कारण विगत युद्ध और संघर्षकाल में इसका विशेष सामरिक महत्व था। गोडवाड क्षेत्र पर निगरानी रखने तथा मेवाड़ की ओर से किसी भी संभावित आक्रमण का मुकाबला करने के लिए मारवाड़ (जोधपुर) रियासत की सेना का एक सशक्त दल यहां तैनात रहता था। सोजत एक प्राचीन स्थान है जो तांबावती (त्रंबावती) नगर के नाम से प्रसिद्ध था। मारवाड़ राज्य के इतिहास में उल्लेख है कि…
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प्राचीन प्रतिमाओं की बहुमूल्य धरोहर संजोए राजस्थान का खजुराहो तवनगढ़ (तिमनगढ़) दुर्ग

प्राचीन प्रतिमाओं की बहुमूल्य धरोहर संजोए राजस्थान का खजुराहो तवनगढ़ (तिमनगढ़) दुर्ग

मध्यकाल का प्रसिद्ध तवनगढ़ दुर्ग बयाना से लगभग 23 कि.मी. दक्षिण में एक उन्नत पर्वत शिखर पर अवस्थित है। Udaipurviews / इस दुर्ग का निर्माण बयाना के महाराजा विजयपाल के ज्येष्ठ पुत्र तवनपाल ने 11 वीं शताब्दी ई. के उत्तरार्द्ध में करवाया था। महाराजा तवनपाल- तहणपाल एवं त्रिभुवनपाल नाम से भी अभिहित थे। अपने निर्माता के नाम पर यह दुर्ग तवनगढ़, तिमनगढ़, त्रिभुवनगढ़ के नाम से भी जाना जाता है। तवनगढ़ दुर्ग समुद्रतल से लगभग एक हजार 309 फीट ऊंची त्रिभुवनगिरि पहाड़ी पर बना हुआ है। दुर्गम पर्वतमालाओं से आवृत, वन संपदा से परिपूर्ण तथा नैसर्गिक सौंदर्य से सुशोभित इस…
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अलवर दुर्ग के भीतर निकुंभ शासकों द्वारा निर्मित महल परंपरागत हिंदू स्थापत्य के उत्कृष्ट उदाहरण

अलवर दुर्ग के भीतर निकुंभ शासकों द्वारा निर्मित महल परंपरागत हिंदू स्थापत्य के उत्कृष्ट उदाहरण

पूर्वी राजस्थान के पर्वतीय दुर्गों में अलवर का बाला किला प्रमुख और उल्लेखनीय है। अरावली पर्वतमालाओं से आवृत एक उन्नत पर्वत शिखर पर बना यह दुर्ग एक सजग प्रहरी की तरह अलवर के मुकुट के समान शोभायमान हैं।अनियमित आकार की पर्वत श्रेणियों पर मीलों तक फैली इसकी सुदृढ़ प्राचीर ऐसी प्रतीत होती है मानो प्रकृतिदेवी अनेक लड़ियों वाला हार पहने हुए हो। नैसर्गिक सौंदर्य से ओतप्रोत यह किला बीते युग की रोमांचक दास्तान संजोए हुए है। अलवर का किला एक प्राचीन दुर्ग है। दुर्ग के निर्माताओं के बारे में प्रामाणिक जानकारी का अभाव है। जनश्रुति के अनुसार विक्रम संवत 1106…
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