– 256 दिककुमारीकाओं के भक्ति- नृत्य से गूंज उठा आयड़ तीर्थ
– आयड़ जैन तीर्थ में चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृृंखला जारी
उदयपुर 20 अगस्त। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में रविवार को विशेष प्रवचन हुए । महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे दोनों साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई। उसके बाद परमात्म भक्ति स्वरूप ब्रह्मचारी, जीन दया प्रतिपालक बाइसवें तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव भव्यातिभव्य के रूप से स्नात्र पूजा के महामहोत्सव के साथ मनाया गया। मेरु पर्वत के भावों को लेकर चौंसठ इन्द्र-इन्द्राणियों के द्वारा परमात्मा का जन्म अभिषेक करवाया गया। जन्मकल्याण महोत्सव कार्यक्रम में छप्पन दिक्कुमारिकाओं द्वारा जन्म महोत्सव मनाया गया। जिसमें नन्हीं-नन्हीं बालिकाओं के द्वारा मोरपिच्छी, सुगंधित जल गुलाबदानी, कलश, दर्पण, चामर, पंखा, रक्षासूत्र, एवं दीपक लकार पूजा-अर्चना की। उसके बाद बालिकाओं द्वारा नृत्य संगीत के माध्मय से पूरा वातावरण भक्तिमय बना दिया। चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि इस दौरान आयोजित प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा ने कहां कि नेमिनाथ परमात्मा ने शादी के समय करुणा- दया भाव लाकर के अनेक पशुओं को अभयदान दिया, जीवों को बचाया ऐसे करुणाशील परमात्मा की भक्ति करनी है। क्योंकि जहां भक्ति होती है वहाँ शक्ति का विचार नहीं आता है। भक्ति तो समर्पण सिखाती है। भक्ति के वशीभूत प्राणी अपना सर्वस्व अर्पित करने के लिए तैयार हो जाता है। उस भक्ति के प्रभाव से ज्ञानावरणीय कर्म का क्षयोपशम निरन्तर बढ़ता है। कहते है कि दुनिया की अन्य बहुत कुछ वस्तुएं पैसे के बल पर प्राप्त हो सकती है परन्तु परमात्मा की भक्ति की प्राप्ति तो अनंत पुण्योदय के बिना असंभव है। जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।
धूमधाम से मनाया नेमिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव
