विद्यापीठ – भारत-नेपाल द्विपक्षीय सम्बंध विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन
– भारत नेपाल का सम्बंध बेटी रोटी का – प्रो. सारंगदेवोत
– भारत नेपाल सम्बंध विभिन्न क्षेत्रों में परस्पर हितों के लिए अहम – प्रो. सारंगदेवोत
उदयपुर 10 जुलाई / जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय की ओर से मंगलवार को प्रतापनगर स्थित आईटी सभागार में भारत – नेपाल द्विपक्षीय सम्बंध विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री बिमलेन्द्र निधि, कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत, कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर, समाजसेवी ब्रिजेश त्रिपाठी, अनामिका निधि, निशा त्रिपाठी ने मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्जवलित कर किया।
मुख्य अतिथि बिमलेन्द्र निधि ने कहा कि वैदिक काल से भारत नेपाल के सम्बंध परस्पर निस्वार्थ हितोें के लिए, रक्षा आदि क्षेत्रों में सदैव महत्वपूर्ण रहे है। भारत के साथ साथ नेपाल भी ऋषि मुनियों का देश है जहॉ नेपाल की संस्कृति भारत की संास्कृतिक विरासत में निरंतर संवाहक है। उन्होंने कहा कि नेपाल वर्तमान समय में हाईड्रो पॉवर के क्षेत्र में बहुलता वाला देश है। जिसमें हाईड्रों पॉवर की बहुलता से भारत में होने वाले विद्युतीकरण की सुगमता के साथ नेपाल के विकास की राह भी आसान होगी। उन्होंने कहा कि भारत में जिस समय ब्रिटिशराज का बोल बाला था, समकालीन नेपाल के लोग राणाओं के शासन से त्रस्त थे। साथ ही उन्हांेने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में नेपाल के कई पूर्वज स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी आहूति दी। विश्व के 10 उंचे पर्वतों में 08 नेपाल में ही स्थित है जो विश्व में नेपाल की प्रमुख धरोहर है। भारत नेपाल सम्बंध रोटी बेटी का रहा है। साथ ही उन्होने विश्वास दिलाया कि वैदिककाल से चले आ रहे भारत नेपाल द्विपक्षीय सम्बंध अटूट थे और रहेगें जिसे केाई भी बाहरी शक्ति तोड़ नहीं सकती।
विषयप्रवर्तन पर अपनी बात रखते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि भारत और नेपाल के मध्य सम्बंध अनादि काल से हिमालय की तरह उंचे भी है और सुदृढ़ भी है , भारत का धर्म भाई माना जाता है। भाई के जो कर्तव्य है वह भारत पूरा करता है और नेपाल भी भाई के धर्म को पूरा करता है। नेपाल में भारत के 150 उपक्रम है। दोनों पडोसी राष्ट्र है, इसके साथ ही दोनों राष्ट्रों की धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक स्थिति में बहुत समानता है। भारत नेपाल द्विपक्षीय सम्बंध देश के आर्थिक, व्यापारिक, व्यवहारिक, रक्षा आदि विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है। उन्होनंे कहा कि भारत नेपाल के सम्बंध वसुदैव कुटुम्बकम की तर्ज पर निरंतर विकासशील है। जहॉ दोनों देशों की प्रकृति, पथ, प्रार्थना, भाषा, संस्कृति, दृष्टि व सृष्टि, सुख – चुनौतियॉ, आशा – निराशा सभी समान है वहॉ उसी प्रकार द्विपक्षीय सम्बंध भी हिमालय के समान सुदृढ़ है। दोनों देश का आवागमन विजा या किसी औपचारिकता के बिना सरल है तथा देश का प्रमुख आस्था का केन्द्र पशुपतीनाथ का नेपाल में होना सम्बंधों में स्वतः प्रगाढ़ता का परिचायक है। दोनों देशों के रीति रिवाज में समन्वय के साथ यहा के उत्सव तीज त्यौहार जिसमें धनवंतरी जयंति जो की वहॉ 1997 में इसके नाम से नेपाल ने टिकिट जारी किया। यही वहॉ की उत्कृष्ट संस्कृति को दर्शाता है। उन्होने कहा कि भारत नेपाल का सम्बंध बेटी रोटी का रहा है जहॉ भारत नेपाल की 1850 किलोमीटर की सीमा पांच राज्यों से गुजरती है जिसमें द्विपक्षीय परस्पर बेटियों के आदान प्रदान की परम्परा वर्षो से रही है। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल के प्राचीनतम सम्बंध द्वापर युग से राजा जनक के नाम से जनकपुरी तथा देवी सीता के समय से विश्व विख्यात है। आज किसी भी देश केा आर्थिक सम्बंधों के रूप में देखा जाता है, भारत नेपाल में 1996 के बाद 11 गुना व्यापार बढा है 1995-96 में नेपाल का बाहरी व्यापार का प्रतिशत 49.8 प्रतिशत था द्विपक्षीय समझौते तहत 2013-14 में 37 प्रतिशत हो गया। छोटा सा देश होने के बावजूद हमारी आर्थिक इकोनोमिक को बहुत प्रभावित कर रहीं है। कभी केाई प्राकृतिक आपदा आती है तो भारत हमेशा नेपाल के लिए खडा रहता है बिना किसी अपेक्षा के।
अध्यक्षता करते हुए भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि भारत नेपाल द्विपक्षीय सम्बंध निरंतर प्रगाढ़ता को प्राप्त हो साथ ही मेवाड व विद्यापीठ परिवार के साथ अत्यधिक स्नेह प्रेम के साथ समंजस्य स्थापित हो इसी विश्वास के साथ उन्होंने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
संगोष्ठी से पूर्व अतिथियों द्वारा विद्यापीठ परिसर में लगी संस्थापक मनीषी पं. जनार्दनराय नागर की आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
संचालन डॉ. हरीश चौबीसा ने किया।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. गजेन्द्र माथुर, प्रो. जीवन सिंह खरकवाल, प्रो. आईजे माथुर, डॉ. अवनीश नागर, डॉ. पारस जैन, सुखाड़िया विवि के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अरूण चतुर्वेदी, डॉ. युवराज सिंह राठौड़, डॉ. मंजु मांडोत, डॉ. राजन सूद, डॉ. रचना राठौड़, डॉ. सुनिता मुर्डिया, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. भवानीपाल सिंह राठौड़, डॉ. संतोष लाम्बा सहित विद्यापीठ के डीन, डायरेक्टर व शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
भारत नेपाल के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक, व्यवहारिक, मूल्यों में समानता – बिमलेन्द्र निधि
