देश के मजदूरों के साथ विश्वासघात मंजूर नहीं – श्रीमाली

 उदयपुर, 26 नवम्बर। अंग्रेजों ने भी देश के मजदूरों के संघर्ष और जीवन को ध्यान में रख उनके पक्ष के कानून बनाए, लेकिन मौजूदा सरकार ने श्रम कानून में बदलाव कर श्रम कोड बना देश के मजदूरों के साथ विश्वासघात किया है, जो हमें मंजूर नहीं। यह विचार श्रमिक एवं किसान संगठनों की तरफ से केन्द्र सरकार द्वारा श्रम कानूनों को बदल श्रम कोड लागू करने और मजदूर, किसान विरोधी नीतियां अपनाने के विरोध में जिला कलेक्ट्री पर आयोजित सभा के दौरान इंटक के प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व राज्य मंत्री जगदीश राज श्रीमाली ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश के मजदूरों का या तो रोजगार छीन रही है या उन पर काम के घंटे का इतना बोझ डाल रही है कि वे इंसान होने को ही भूल जाये। उन्होंने कहा कि जैसे देश के किसानों ने अपने आंदोलन से मोदी सरकार को काले कृषि कानून वापस लेने को मजबूर किया था, वैसे ही मजदूर संघर्ष इन काले श्रम कोड को वापस लेने को मजबूर करेगा।
सभा में एटू के राज्य अध्यक्ष शंकरलाल चौधरी ने कहा कि मोदी सरकार ने श्रम कानूनों में बदलाव कर यह साबित कर दिया है कि वह लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखती है। उन्होंने कहा कि देश के श्रमिक संगठन श्रम कानूनों और श्रमिकों की स्थिति के बारे में केन्द्र सरकार से बैठक बुलाने की मांग कर रहे थे, लेकिन यह पिछले 8 साल से यह बैठक नहीं बुलाई गयी और संसद में यह कानून बिना चर्चा के लागू कर दिया गया।
सभा में सीटू जिलाध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने कहा कि मोदी अपने शासनकाल को अमृतकाल कहते है, लेकिन वास्तव में अमृत सिर्फ पूंजिपतियों के हिस्से में आया है और देश की जनता के हिस्से में मात्र जहर। उन्होंने कहा कि मोदी जिस वर्ग के विकास की बाते करते है वास्तव में उनके जीवन को बर्बाद करने को तय कर देते है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में नीति की तो क्या बात की जावे, इनकी तो नियत ही खराब है।
सभा में पूर्व संभागीय श्रम आयुक्त सुनील मित्तल ने कहा कि श्रम कोड में 100 की जगह 300 श्रमिक तक के कारखानों में बिना सरकार की स्वीकृति के कारखाने को बंद करने की ईजाजत देकर मजदूरों के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि यूनियन की मान्यता व हड़ताल पर कठोर प्रतिबंध लगाना, कार्य शर्तों में लचीलेपन के नाम पर मजदूरों को 12 घंटे कार्य की ईजाजत देना, निरीक्षण व्यवस्था को कमजोर करना, सीधे-सीधें मजदूरों के हक पर हमला है।
सभा में एटक के जिला सचिव सुभाष श्रीमाली ने कहा कि नये श्रम कोड में मजदुरों की मजदूरी कम करना, नियत अवधि के लिए रोजगार, कार्यस्थल पर सुरक्षा के प्रावधानों से मजदूर तबके को बाहर करना जैसे प्रावधान कर केन्द्र सरकार ने श्रमिकों के साथ अन्याय किया है।
सभा में एमसीपीआई की नीला शर्मा ने कहा कि देश के मजदूरों को यह कहा जाता है कि मोदी जब दिन में 18 घंटे काम कर सकते है तो मजदूर 12 घंटे क्यों नहीं, तो हम यह बताना चाहते है कि मोदी तो 18 घंटे में से 12 घंटे अपने मेकअप का काम करते है और बाकी के 6 घंटे फोटो खिंचाने और रैली करने का। जबकि मजदूर वास्तव में अपनी मजदूरी से देश का निर्माण करते है।
संभा में इंटक के इन्दुशेखर व्यास ने कहा कि किसी भी संस्थान में उन्हें ही यूनियन बनाने की स्वीकृति होती है जिनकी सदस्य संख्या 50 प्रतिशत या उससे अधिक होगी, तो हम मोदी से यह कहना चाहते है कि यह प्रावधान पहले लोकसभा और विधानसभा सदस्य की योग्यता के लिए अपनाये। उन्होंने कहा कि देश का मजदूर किसानों की तरह दिल्ली को चारों ओर से घेर कर सरकार को श्रम कोड को वापस लेने को मजबूर करेगा।
सभा में अखिल भारतीय किसान सभा के जिला सचिव प्रभुलाल भगोरा ने कहा कि मोदी ने किसानों को फसल का लाभकारी मूल्य देने और उनकी आय को दुगुना करने का वायदा किया था, लेकिन आज किसान भूखों मर रहा है और उसे आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश की संसद में वन अधिकार कानून बना, लेकिन प्रशासन, वन विभाग, पुलिस आये दिन आदिवासियों को उनकी वन भूमि से बेदखल कर रही है। उन्होंने कहा कि देश का किसान और मजदूर व्यापक एकता का निर्माण कर इन हालात को बदलेगा।
सभा में कर्मचारी संयुक्त महासंघ के लच्छीराम गुर्जर ने कहा कि केन्द्र सरकार, मजदूरों एवं किसानों पर लगातार हमला कर पंूजिपतियों की जेब भर रही है जो देश की अर्थव्यवस्था और विकास के लिए भी ठीक नहीं है।
सभा को सीटू के हीरालाल सालवी, गुमानसिंह राव, शमशेर खान, अजमद शेख, मोहम्मद निजाम, वसीम शाह, इंटक के हेमन्त त्रिवेदी, सुरेश श्रीमाली, खुशवेन्द्र कुमावत, तख्त सिंह, एक्टू के अनिल शर्मा, एपवा की नजमा, अरावली निर्माण मजदूर युनियन के गोविन्द लाल ओड, आदिवादी जन अधिकार एका मंच के जिला सचिव प्रेम पारगी, घरेलु कामगार महिला संगठन की रेखा भटनागर, ऑटो चालक यूनियन के भगवती लाल साहू, आर.एम.एस.आर.यू. के सचिव अजय तिवारी, कच्चीबस्ती फैडरेशन के दामोदर कुमावत, बैंक यूनियन के विनोद कपूर, पर्यावरण मित्र मन्नाराम डांगी, वरिष्ठ पत्रकार हिम्मत सेठ, शिक्षाविद प्रो. हेमेन्द्र चंडालिया आदि ने भी विचार व्यक्त किये।
सभा के बाद समन्वय समिति के संयोजक पी.एस. खींची के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल ने उप जिला कलेक्टर (गिर्वा) को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर मजदूर विरोधी चारों श्रम कोड वापस लेने, स्वामीनाथन कमेटी अनुसार फसलो की एमएसपी लागू कर उनको कानूनी गारंटी देने, वन अधिकार कानूनों में आदिवासियों के हितों के खिलाफ हो रहे बदलाव वापस लेकर कब्जेधारियों को वन अधिकार के पट्टे देने, बिजली के स्मार्ट मीटर थोपना बंद करने, मजदूरों का मासिक न्यूनतम वेतन 26,000/-रु. करने, नियमित काम में ठेका प्रथा बंद करने, ओपीएस बहाल करने, श्रमिकों के लिए श्रम कल्याण की योजनाएं लागू करने की मांग की गयी।
सभा के पूर्व श्रमिक संगठनों ने टाउनहॉल से रैली प्रारम्भ की जो रैली बापू बाजार, देहली गेट होते हुए जिला कलेक्ट्री कार्यालय पहुंची, जहां पर प्रदर्शन कर सभा की।
By Udaipurviews

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