उदयपुर। संसद में आदिवासी समुदाय एवं बांसवाडा—डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत के द्धारा बांसवाड़ा-डूंगरपुर के प्रति धमकी भरे अंदाज में की गई टिप्पणी के विरोध मे उदयपुर में बाप पार्टी ने मगलवार को जिला कलेक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ कार्यवाही की मांग की। बाप पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि गृह मंत्री द्वारा यह कहा गया कि “आप चुनाव लड़कर यहां बैठे हैं, नहीं तो आप भी सरेंडर की लिस्ट में होते”, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सांसद एवं पूरे आदिवासी समुदाय को नक्सलवाद से जोड़ने का प्रयास किया है। यह कथन न केवल एक जनप्रतिनिधि की गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि आदिवासी समाज की छवि को भी ठेस पहुंचाने वाला है। इससे पूरे आदिवासी समुदाय में आक्रोश एवं असंतोष व्याप्त है। संसद में माओवादी उन्मूलन पर हो रही चर्चा में सांसद राजकुमार रोत ने भाग लेते हुए कहा था कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित आदिवासी समुदाय हैं, लेकिन बड़ा दुर्भाग्य है कि 47 आदिवासी आरक्षित सीट से चुनकर आने वाले सांसदों में बीजेपी के और से किसी को भी समय नहीं दिया गया।
देश में कई जगह जल-जंगल-जमीन को लेकर संघर्षरत आदिवासियों की आवाज को दबाने के लिए भी नक्सलवाद का ठप्पा लगा दिया जाता है। संविधान में आदिवासी समुदाय के लिए जो 5वी 6वी अनुसूची जैसे विशेषाधिकार हैं उनको लागू करने, पैसा क़ानून, फारेस्ट राइट एक्ट एवं आदिवासियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जंजमेंट को लागू कर आदिवासियों के साथ न्याय करें। जब अमित शाह जी ने अपने रिप्लाई भाषण दिया तब बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत को सरेंडर की लिस्ट में नाम होने तक की बात कह दी, जिससे बांसवाड़ा डूंगरपुर सहित पूरे देश के आदिवासी, दलित व पिछडे समुदाय में व्याप्त आक्रोश हैं। हमारी मुख्य मांग है कि संसद में दिए गए उक्त बयान के लिए माननीय गृह मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देवे और संसद में दिए गए इस बयान को रिकॉर्ड से हटाने की कार्यवाही की जाए। भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि एवं समुदाय के प्रति इस प्रकार की टिप्पणी न हो, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
सांसद रोत के खिलाफ की गई टिप्पणी के विरोध में बाप पार्टी का प्रदर्शन
