आयुर्वेद भारत की स्वास्थ्य संचेतना का मूल आधार – प्रो. सारंगदेवोत

उदयपुर 21 जून / जीवन में संघर्ष मानव को निरंतर संशक्त बनाता है, भारत का प्राचीन ज्ञान विगत शताब्दियों वर्षो से समृद्ध है, उन मूलभूत प्राचीन परम्पराओं की ओर पुनः लौटना होगा तथा आयुर्वेद को अपनाकर मानव स्वास्थ्य चेतना की ओर अग्रेसित होना होगा। जीवैम शरदः शतम की संकल्पना को चरितार्थ करते हुए बताया कि भारत की प्राचीन व वैज्ञानिक परम्परा के  न होने से ही आज मानव रोगों से संघर्ष कर रहा है। अतः व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहना ही वास्तविक सुखायु है। उक्त विचार बुधवार को जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय के संस्थापक मनीषी पंडित जनार्दनराय नागर की 112वीं जयंती पर आयोजित सात दिवसीय समारेाह के तहत प्रतापनगर स्थित आईटी सभागार में स्वास्थ्य की भारतीय संचेतना एवं योग विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने बतौर अध्यक्षीय उद्बोधन में कही। उन्होंने अष्टांग योग का विश्लेषण करते हुए यम, नियम, आसन प्राणायाम आदि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव अष्टांग योग जीवन में उतार कर पूर्णता प्राप्त कर सकता है। वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा को सार्थक करते हुए कहा कि भारत विश्व में समृद्ध राष्ट्र है। उन्होंने जनुभाई के प्रति अपनी कृतज्ञता अर्पित करते हुए शिक्षा , भारतीय मूल्य व संस्कारों में उनके द्वारा किए गये योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत सनातन मूल्यों व परम्परागत विधाओं का विश्व में डंका है। मुख्य वक्ता डॉ. एमी धनकर ने आदि गुरू शिव से लेकर पतंजली मुनी द्वारा कहे गए योगश्चितवृत्तिनिरोधः अर्थात चित की वृत्तियों पर नियंत्रण करना अतिआवश्य है एवं सत्य अहिंसा का पालन करते हुए जीव हत्या न कर प्रकृति संरक्षण करने पर जोर दिया। मुख्य अतिथि केन्द्रीय विवि हरियाणा की प्रो. नीरजा धनकर ने कहा कि आज के आधुनिक युग में शिक्षा के साथ – साथ सामाजिक मूल्यों का भी छात्रों के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है एवं योग मार्ग अपनाकर जीवन को सफल बना सकते हैं। एक अच्छी शिक्षा पद्धति वही है जो छात्रों को जीवन में श्रेष्ठता की ओर ले जाये। कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मशीनरी युग को त्यागकर स्वयं परिश्रम करके स्वस्थ जीवन जीने पर जोर दिया।

संचालन डॉ. रोहित कुमावत ने किया।

पुस्तक का हुआ विमोचन:-

समारोह में अतिथियों द्वारा डॉ. हेमलता  जैन द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘ रमसा की वस्तुस्थिति एवं क्रियान्वयन में आने वाली समस्याएॅ ’’ का विमोचन किया गया।

इस अवसर पर डॉ. तरूण श्रीमाली, डॉ. हीना खान, डॉ. नीरू राठौड़, डॉ. दिनेश श्रीमाली, डॉ. अमी राठौड, डॉ. बलिदान जैन, डॉ. सुनिता मुर्डिया, सुभाष बोहरा, डॉ. सुभाष पुरोहित, डॉ. ममता कुमावत, डॉ. हेमलता जैन, डॉ. सरिता मेनारिया, डॉ. हरीश चौबीसा, देवेन्द्र पालीवाल, डॉ. प्रेरणा भाटी, डॉ. मान सिंह चुण्डावत, गजेन्द्र सिंह,  उमराव सिंह राणावत, रतनडांगी, डॉ. हेमंत साहू, लहरनाथ, डॉ. वीणा द्विवेदी, कृष्णकांत कुमावत, डॉ. दिलीप चौधरी, रतन डांगी, जितेन्द्र सिंह चौहान, मनोज यादव, डॉ. ललित सालवी, दुर्गाशंकर , मुकेशनाथ,  सहित विद्यापीठ के डीन, डायरेक्टर एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
उक्त जानकारी निजी सचिव कृष्णकांत कुमावत ने दी।

By Udaipurviews

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