अरावली पर्वतमाला संरक्षण की लड़ाई आज की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की लड़ाई है, मनरेगा को खत्म करने का प्रयास मोदी सरकार की संकीर्ण मानसिकता का परिचय – फतह सिंह राठौड़
अरावली पर्वतमाला संरक्षण एवं मनरेगा को सुनियोजित तरीके से खत्म करने के विरोध में उदयपुर शहर एवं देहात कांग्रेस ने निकाली जन-जागरण रैली
उदयपुर। 27 दिसंबर। देश के करोड़ों लोगों की जीवन रेखा कही जाने वाली अरावली पर्वतमाला के संरक्षण एवं केंद्र की अहंकारी मोदी सरकार द्वारा मनरेगा को कमजोर करने के कुप्रयास को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार आज उदयपुर शहर एवं देहात जिला कांग्रेस कमेटी ने संयुक्त रूप से जन-जागरण अभियान के तहत रैली निकाली। उदयपुर देहात जिला कांग्रेस प्रवक्ता डॉ संजीव राजपुरोहित ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार दिनांक 27 से 31 दिसंबर, 2025 तक जिला मुख्यालय से बूथ स्तर तक चलने वाले जन-जागरण अभियान के तहत आज उदयपुर शहर एवं देहात जिला कांग्रेस कमेटी ने संयुक्त रूप से जन-जागरण रैली निकाली। रैली प्रातः 11.30 बजे नगर निगम, टाउन हॉल स्थित शहीद स्मारक से रवाना होकर सूरजपोल, अश्विनी बाजार होते हुए चेतक स्थित मोहता पार्क तक निकाली गई। रैली में सैकड़ों की संख्या में उदयपुर शहर एवं देहात कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मोहता पार्क पर रैली में उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि अरावली पर लगातार हो रहे हमले भाजपा की नीति, नीयत और शासन की सच्चाई को बेनकाब कर रहे हैं। भाजपा सरकार में प्रदेश में माफ़ियाओं का राज चल रहा है। प्रदेश की कानून व्यवस्था एवं राज प्रणाली पूरी तरह से ठप्प हो गई है। आए दिन अरावली में जारी अवैध खनन की खबरें सरकारी संरक्षण को बयां कर रही है। राजस्थान की अरावली आज सिर्फ अवैध खनन का शिकार नहीं है, बल्कि भाजपा सरकार की संरक्षणहीन नीतियों की शिकार बनती जा रही है। ऐसे में करोड़ों लोगों की जीवन रेखा अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए हम सभी को आगे आना पड़ेगा। और केंद्र एवं राज्य सरकार पर जन-जागरण के माध्यम से दबाव बनाना पड़ेगा कि वो माननीय सुप्रीम कोर्ट में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए पैरवी कर इस आदेश को पुनर्विचार के लिए मजबूती से देशवासियों की बात के साथ आगे रखे। अरावली कोई ज़मीन का टुकड़ा नहीं, देश का प्राकृतिक कवच है। जो सरकार इसे मुनाफ़े की नज़र से देख रही है, वह आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बेच रही है। अरावली पर हमला दरअसल जनता के जीवन पर हमला है।
मीणा ने मनरेगा को सुनियोजित तरीके से खत्म करने के कुप्रयास पर कहा कि मनरेगा के कानून को कमजोर करना उन करोड़ों मजदूरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है जिनके पास आय का कोई और जरिया नहीं है। यह बदलाव देश के विकास के लिए एक बड़ी बाधा साबित होगा। मनरेगा के माध्यम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के नाम को खत्म करने की कोशिश मोदी सरकार की कुंठित सोच है। मोदी सरकार ने सुधार के नाम पर लोकसभा में एक बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है, यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छिनने की जान बूछकर की गई कोशिश है। मनरेगा का नाम बदल कर योजना को कमजोर करने का केंद्र सरकार का यह कदम महात्मा गांधी के आदर्शों का सीधा अपमान है और ग्रामीण रोजगार पर खुली जंग का ऐलान है। रिकॉर्ड बेरोजगारी से भारत के युवाओं को तबाह करने के बाद मोदी सरकार अब गरीब परिवारों की बची हुई आज आखिरी आर्थिक सुरक्षा को निशाना बना रही है। हम सड़क से लेकर संसद तक हर मंच पर इसका विरोध करेंगे।
उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने कहा कि अरावली पर्वतमाला की पवित्र चोटियाँ केवल पहाड़ नहीं हैं। ये हमारी सभ्यता की जड़ें, हमारी आस्था की ऊँचाइयाँ और आने वाली पीढ़ियों के जीवन की सबसे मज़बूत ढाल हैं। यह वही अरावली है जिसने रेगिस्तान को रोककर जीवन को बचाया, जलस्रोतों को संरक्षित किया और प्रकृति के संतुलन को सदियों तक संभाले रखा। यह संघर्ष किसी एक दिन का नहीं, किसी एक यात्रा का नहीं, और न ही किसी एक व्यक्ति या संगठन का है। यह सत्ता के अहंकार और अन्याय के खिलाफ जनता की सामूहिक चेतना का उदय है, एक ऐसी चेतना जो अब दबाई नहीं जा सकती। इतिहास साक्षी है जब-जब सत्ता ने प्रकृति को मुनाफ़े का साधन समझा, जब-जब पहाड़ों को खोदने और जंगलों को बेचने का दुस्साहस किया, तब-तब जनता ने सड़कों पर उतरकर उस अन्याय को खुली चुनौती दी है। यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक अरावली की एक-एक चोटी सुरक्षित नहीं हो जाती। यह लड़ाई केवल पर्यावरण की नहीं, यह जल, जंगल, ज़मीन और इंसान के अस्तित्व की लड़ाई है। यह लड़ाई आज की नहीं, आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की है।
राठौड़ ने मनरेगा के नाम बदलने पर कहा कि नए कानून के हिसाब से योजना के बजट की सीमा भी केंद्र सरकार तय करेगी और साथ ही राज्य सरकारों से कहा जाएगा की इस योजना में 40% तक बजट वहन करे।मनरेगा देश में गरीब परिवारों के आर्थिक विकास के लिए शुरू किया गया था। ज्यादा गरीब परिवार जिस राज्य में होंगे वह राज्य दूसरे राज्य की तुलना में भी आर्थिक सक्षम नहीं होगा। गरीब राज्य इसलिए गरीब है क्योंकि उनके पास बजट नहीं है ऐसे में वह राज्य नई मनरेगा योजना में योजना का 40% बजट वहन करे यह असंभव है। कुल मिलाकर सुनियोजित तरीके से मनरेगा को खत्म करने की कोशिश है। मनरेगा को खत्म करने का प्रयास मोदी सरकार की संकीर्ण मानसिकता का परिचय देती है।
जन-जागरण रैली में उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा, उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़, पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, पूर्व विधायक प्रीति शक्तावत, पीसीसी उपाध्यक्ष सुरेश श्रीमाली, पीसीसी महासचिव लाल सिंह झाला, पंकज कुमार शर्मा, गोपाल शर्मा, पूर्व मंत्री डॉ मांगी लाल गरासिया, पूर्व मंत्री जगदीश राज श्रीमाली, पीसीसी सचिव दिनेश श्रीमाली, विधायक प्रत्याशी विवेक कटारा, पूर्व विधायक सज्जन कटारा, पीसीसी सदस्य राम लाल गायरी, प्रोफेसर दरियाव सिंह चुंडावत, गोपाल सिंह चौहान, दलपत सिंह चुंडावत, मोहम्मद अय्यूब, उदयपुर देहात जिला संगठन महासचिव गजेंद्र कोठारी, पूर्व उप जिला प्रमुख लक्ष्मी नारायण पंड्या, प्रवक्ता डॉ संजीव राजपुरोहित, शहर प्रवक्ता पंकज पालीवाल, शिवशंकर मेनारिया, डॉ कौशल नागदा, राजीव सुहालका, खूबी लाल मेनारिया, दिनेश दवे, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बंसी लाल मीणा, श्याम लाल चौधरी , मथुरेश नागदा, ब्लॉक अध्यक्ष राम सिंह चदाणा, अजय सिंह, सोमेश्वर मीणा, पूर्व सरपंच रूप लाल सालवी, महिला कांग्रेस की नजमा मेवाफरोश, सीमा पंचोली, डॉ दिव्यानी कटारा, अमर सिंह झाला, हरि सिंह झाला, झाड़ोल प्रधान राधा देवी परमार, पूर्व प्रधान सदन देवी, ओम प्रकाश गमेती, जय प्रकाश निमावत, पूर्व पार्षद शंकर चंदेल, हिदायतुल्ला, लक्ष्मी लाल सोनी, दिनेश औदिच्य, राजेश मेनारिया, मोहम्मद रईस खान, फारुख कुरैशी, गोपाल सरपटा, रतन लाल पूर्बिया, दिनेश पानेरी, चंद्रवीर गुर्जर , शिव लाल गुर्जर, सचिन गुर्जर, माधव लाल अहीर, मोहम्मद शाहिद, सुरेश सोलंकी, मयंक खमेसरा, तीरथ सिंह खरेलिया, विष्णु पटेल, गणेश लाल शर्मा, कमल चौधरी, जीतेश खटीक, रवि भावा सहित कई पदाधिकारी एवम कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
