उदयपुर, 04 फरवरी, ‘वर्ल्ड कैंसर डे’ पर राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में खुली चर्चा का आयोजन किया गया। खुली चर्चा मे सम्बोधित करते हुए संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बिमारी से पशुधन भी अछूतें नहीं है। पशुओ में पाये जाने वाले कैंसर को भी गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। पशुओं में सामान्यतया हॉर्न कैंसर, स्किन कैंसर, आंखों के कैंसर, थनों के कैंसर, पेट एवं आंतों में पाये जाने वाले कैंसर है जो कि समय पर निदान करने से इनकी गम्भीरता को रोका जा सकता है।
डॉ. छंगाणी ने कहा कि आज के दौर में मानव ही नहीं अपितु पशु भी इसकी चपेट में आ रहे है। पशुओं में सही रख रखाव, पीने के लिए स्वच्छ जल एवं संतुलित आहार देकर कैंसर रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। पशुओं की सही देखभल, पेट के कीड़ों की दवा एवं समय पर टीकाकरण करवा कर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। कैंसर जैसी बिमारियों के लक्षण दिखाई देने पर तुरन्त नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी से सम्पर्क कर परामर्श लेना चाहिए। इस अवसर पर संस्थान के डॉ. पदमा मील ने कहा कि पशुओं में होने वाले ज्यादातर कैंसर शल्य चिकित्सा द्वारा ठीक किये जा सकते है। डॉ. ओमप्रकाश साहू ने बताया कि पशुओं में सामान्यतया होने वाले हॉर्न कैसर को बाल्यावस्था में ही उनकी डिबैडिंग करवाकर रोका जा सकता है। पशुपालन डिप्लोमा के विद्यार्थियो ने भी अपने विचार रखे।
पशुओं के कैंसर को भी लेना होगा गंभीरता से
