उदयपुर, 12 सितम्बर : मेवाड़-वागड़ क्षेत्र में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित करने की मांग को लेकर शुक्रवार को उदयपुर में वकीलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। लंबे समय से चली आ रही इस मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर से रैली निकाली और कलेक्ट्री चौराहे तक विरोध मार्च किया। इस दौरान टायर जलाए गए और “उदयपुर में हाईकोर्ट बेंच बनाकर रहेंगे” जैसे नारे गूंजते रहे।
बार एसोसिएशन उदयपुर के अध्यक्ष चन्द्रभान सिंह शक्तावत ने जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे जनता की इस गंभीर मांग को लेकर उदासीन हैं। लगता है हमारे प्रतिनिधि खुद लाचार और बेबस हैं, इसलिए स्पष्ट रूप से जनता के सामने सच नहीं बोल पा रहे। पूर्व महासचिव चक्रवर्ती सिंह राव ने कहा कि सांसद और विधायकों की सेंट्रल तक सीधी पहुंच न होने से क्षेत्र की जनता नुकसान उठा रही है।
वकीलों का कहना है कि खंडपीठ की अनुपस्थिति में छोटे-छोटे मामलों के लिए भी लोगों को 500 किलोमीटर दूर जोधपुर जाना पड़ता है। गरीब और वंचित वर्ग के लिए यह न केवल समय और धन की बर्बादी है, बल्कि न्याय तक उनकी पहुंच भी बाधित होती है।
इस बीच, उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को पत्र लिखकर चेताया है कि यदि उदयपुर को फिर नजरअंदाज किया गया तो यह आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि बीकानेर में वर्चुअल हाईकोर्ट बेंच की चर्चा से मेवाड़ की जनता में गहरी नाराजगी है।
प्रदर्शन के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा और अन्य अधिकारी भारी जाब्ते के साथ मौजूद रहे। अधिवक्ताओं ने सरकार को साफ चेतावनी दी कि यदि उदयपुर में हाईकोर्ट बेंच स्थापित नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ वकीलों का नहीं, बल्कि पूरे मेवाड़-वागड़ की जनता का सवाल है।
इस विरोध प्रदर्शन ने साफ संकेत दिया है कि न्याय की समानता और क्षेत्रीय संतुलन के लिए उदयपुर की आवाज अब और तेज होगी, और अगर सरकार ने अनदेखी जारी रखी तो आने वाले चुनावों में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।
