उदयपुर की आकांक्षा ने बिना कोचिंग के आरएएस परीक्षा पास की

-दूसरी बार में आई छठीं रैंक, पहली बार थी 950 प्लस करने की मंशा, विश्वास, लगन और धैर्य ने दिलाई सफलता
उदयपुर, सुभाष शर्मा: लेकसिटी उदयपुर की आकांक्षा ने साबित कर दिया कि कर गुजरने की मंशा, विश्वास, लगन और धैर्य के साथ काम किया जाए तो सफलता अवश्य मिलेगी। आकांक्षा ने आरएएस परीक्षा पास की है और उसे राजस्थान में छठवीं रैंक हांसिल हुई है। उसकी इस परीक्षा से पूरा परिवार ही नहीं, बल्कि उदयपुर और संपूर्ण मेवाड़ में खुशी का माहौल है।
उदयपुर की वीआईपी कॉलोनी के स्वर्गीय श्रीलाल दुबे की सबसे छोटी बेटी आकांक्षा ने बताया कि वह उदयपुर के पास साकरौदा स्थित राजकीय स्कूल में गणित विषय की प्राध्यापक है और पिछले छह साल से बच्चों को गणित पढ़ाती आ रही थीं। उसकी सोच पहले आरएएस फाइट करने की नहीं थी लेकिन जब लोगों ने कहा कि तुम इस दायरे से बाहर निकलोगी तो समाज के लिए ज्यादा काम कर पाओगी। तब जाकर उसने आरएएस की परीक्षा देने का निर्णय लिया। पहले एटेम्प्ट में उसकी रैंक 950 प्लस थी और उसने दूसरी बार परीक्षा देने का निर्णय लिया।
दस साल की थी तब पिता की दुर्घटना में हो गई थी मौत
आकांक्षा बताती हैं कि वह महज दस साल की थी तब उनके पिता की दुर्घटना में मौत हो गई थी। लेकिन मां उषा दुबे, बड़े भाई—बहनों ने कभी उसे पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। वह लगातार अपनी पढ़ाई में व्यस्त रही और गणित की प्राध्यापक बन गई। बड़े भाई और बहनें उसका हौंसला बढ़ाते रहे और वह आगे बढ़ती रही।
कभी कोचिंग नहीं की, समय का किया सदुपयोग
आकांक्षा ने बताया कि छह से सात घंटे स्कूल में बच्चों को पढ़ाने में लग जाते। जिसके बाद वह अपनी पढ़ाई जारी रखती। वह कहती है कि आरएएस जैसी परीक्षा पास करने का मतलब लगातार दो से ढाई साल अच्छी पढ़ाई करना। जिसके लिए उसने समय का सदुपयोग किया और अपनी पढ़ाई जारी रखी। सिलेबस का पता लगाकर उसने अपनी पढ़ाई को ही फोकस में रखा। कोचिंग नहीं करने पर कई लोगों ने निराश भी किया और कहा, ऐसे सफलता नहीं मिलेगी लेकिन कुछ अनुभवी लोगों ने बताया कि वह सेल्फ रीडिंग जारी रखें तो सफलता मिलेगी।
कम से कम ली स्कूल से छुट्टियां
आकांक्षा दुबे का कहना है कि उसे पता था कि यदि अपनी पढ़ाई के लिए अवकाश लेना पड़ा तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। जिसके चलते उसने कम से कम छुट्टियां ही लीं। इसके लिए उसने ऐसे समय पर अवकाश लिया जब बच्चों की परीक्षाएं होतीं। जैसे स्कूल टेस्ट तथा अद्र्ध वार्षिक परीक्षाएं। इस समय तक कोर्स पूरा हो चुका होता और बच्चे भी पढ़ाई में विजी रहते। ऐसे समय को उसने अपनी पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय के रूप में चुना।
प्री, मैन की बजाय इंटरव्यू की तैयारी में दिया ज्यादा समय
आकांक्षा ने बताया कि प्री तथा मैन परीक्षा की बजाय सबसे ज्यादा पढ़ाई इंटरव्यू के लिए दिया। उसे पता था कि इंटरव्यू में उसका अच्छा प्रदर्शन उसके लिए फायदेमंद साबित होगा।
महिलाओं और बच्चों के लिए करना चाहेगी काम
आकांक्षा का कहना है कि वह आरएएस बनने के बाद महिलाओं और बच्चों की बेहतरी के लिए काम करना चाहेगी। हालांकि यह सब उसकी नियुक्ति और परिस्थिति पर निर्भर रहेगा।

By Udaipurviews

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