पेराफेरी में पट्टों का आंदोलन के बाद संघर्ष समिति की मांगो पर प्रशासन सहमत

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

-निगम_पंचायतों को बसावट वाली भूमि हस्तांतरण करने की प्रक्रिया शुरू
-प्रशासन ने आगामी 15 जनवरी तक का मांगा समय
उदयपुर, 3 जनवरी: यूडीए पेराफेरी के 205गांवों में पट्टों को लेकर जारी पेराफेरी संघर्ष समिति के आंदोलन में प्रशासन सकारात्मक रुख अपनाते हुए आबादी बसावट वाली भूमि संबंधित निकाय पंचायत को हस्तांतरित करने पर सहमत हो गया है। इसके लिए संघर्ष समिति कोर टीम से 15 जनवरी तक का समय मांगा गया है।
पेराफेरी संघर्ष समिति के संयोजक चंदन सिंह देवड़ा ने शनिवार को प्रेसवार्ता में पेराफेरी पंचायतों के जनप्रतिनिधि, सर्व समाज के प्रतिनिधि, मेवाड़ किसान सभा,करणी सेना समेत तमाम सर्व समाज के 24 संगठनों की मौजूदगी में यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासनिक चर्चा के बाद संघर्ष समिति कोर टीम और सर्व समाज की बैठक में प्रशासनिक रुख और आंदोलन की रणनीति तय की गई है। उन्होंने बताया कि निगम विस्तार में शामिल पेराफेरी की 23पंचायतों के 43 गांवों में आबादी बसावट वाले खसरे यूडीए जरिए कलक्टर किस्म आबादी दर्ज कर नगर निगम को हस्तांतरित करेगा। यहां 1992के नियम की बजाय पूर्व में 2018तक जारी 69ए के पट्टे की बात पर जिला प्रशाशन सरकार को पत्र लिख संशोधन हेतु मार्गदर्शन मांगा जाएगा, जिसके उपरांत जारी आदेश पर निगम नियमानुसार पट्टे जारी कर सकेगा। देवड़ा ने बताया कि निगम क्षेत्र से बाहर यूडीए पेराफेरी के पंचायतों में आबादी बसावट वाली भूमि किस्म आबादी दर्ज कर संबंधित पंचायतों को हस्तांतरित की जाएगी ताकि पंचायत नियमानुसार पट्टे दे देगी।

नहीं बदलेगी चरागाह भूमि की किस्म
संयोजक देवड़ा ने स्पष्ट किया कि नए शामिल गांवों में चरागाह भूमि यूडीए के नाम रहेगी लेकिन उसकी किस्म नहीं बदली जाएगी ताकि यह जमीन सुरक्षित रह सके। यूडीए भी इसे किसी को आवंटित नहीं कर सकेगा। घुमंतू अर्द्ध घुमंतू परिवारों को जमीन हस्तांतरण पश्चात संबंधित एजेंसी से नियमानुसार पट्टे जारी हो सकेंगे। जिन पहाड़ी गांवों को यूडीए से बाहर रखने की मांग हो रही है, उनको लेकर प्रशाशन पुनः राज्य सरकार को ज्ञापन के साथ पत्र भेजकर वस्तुस्थिति से अवगत कराएगा।

संघर्ष समिति एकजुट तमाम आरोप खारिज
संयोजक देवड़ा ने कुछ दिनों पूर्व आंदोलन से वास्ता नहीं रखने वाले कुछ लोगों द्वारा संयोजक और कोर कमेटी सदस्यों पर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। संयोजक और तमाम सदस्यों ने कहा कि वे यह आंदोलन आबादी बसावट वालों को पट्टे दिलाने के लिए कर रहे है खाली जमीनों के लिए नहीं। संघर्ष समिति अतिक्रमण की पक्षधर नहीं है। प्रशासन सरकार के नियम कायदों के आधार पर प्रक्रिया करे, सालों से बसे लोगों के साथ न्याय हो। इसमें कोई राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए किसी के बहकावे में आकर उल जलूल बात करता है तो जनता उनको जवाब दे देगी। संघर्ष समिति का लक्ष्य आम आदमी को नियमों के मुताबिक पट्टे दिलवाना है।

By Udaipurviews

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