प्रशासन की समुदाय से अपील, अक्षय तृतीया और सावों को लेकर प्रशासन मुस्तैद
प्रतापगढ़,2 मई।आगामी अक्षय तृतीया और अन्य सावों पर बाल विवाह रोकने के लिये प्रशासन ने कमर कस ली है। जिला कलक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने बताया की बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष के कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के को नाबालिग माना जाता है। नाबालिगों द्वारा किया गया विवाह गंभीर और गैर-जमानती अपराध है।उन्होंने बताया की बाल विवाह करने वाले बालिग पुरुष समेत पंडित/मौलवी, मैरिज होम, कैटरिंग, हलवाई, घराती-बाराती सभी दो वर्ष तक के कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने से दंडनीय होते हैं। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा पुलिस विभाग को ग्रामीण स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और एनजीओ को बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के सभी प्रावधानों की जानकारी देने के निर्देश दिए है। साथ ही उन्होंने जागरूकता फैलाने के लिए एनजीओ और आमजन से भी अपील की है।
बाल विवाह होने पर होगी कार्रवाई
बाल विवाह की शिकायत किससे और कहाँ करें?
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनवारी लाल मीणा ने बताया की बाल विवाह की शिकायत 1098, 1090 और 100 नंबर पर डायल कर या सीधे बाल विवाह निषेध अधिकारी , नजदीकी पुलिस थाने या जिलाधिकारी से भी की जा सकती है। उन्होंने बताया की बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की धारा तीन के अनुसार प्रत्येक ऐसा बाल-विवाह शून्यकरणीय होगा, जिसमें विवाह बंधन में आने वाला कोई भी पक्षकार विवाह के समय यदि महिला है तो 18 वर्ष से कम और पुरुष है तो 21 वर्ष से कम हो। उन्होंने बताया की चाहे ऐसा विवाह इस अधिनियम के आने से पहले सम्पन्न हुआ हो, या बाद में। ऐसे बाल-विवाह के संबंध में, विवाह बंधन में आने वाले ऐसे पक्षकार द्वारा, जो विवाह के समय बालक था, जिला न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करके शून्यता का फरमान प्राप्त किया जा सकता है, बाल विवाह के बंधन में बालक-बालिका वयस्क होने के दो साल के भीतर जिला न्यायालय में अर्जी दायर कर सकते हैं।
जाने क्या है प्रावधान?
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया की बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 की धारा 9 के अनुसार जब अठारह वर्ष से अधिक आयु का कोई पुरुष वयस्क होते हुए बाल-विवाह करेगा वह दो वर्ष तक के कठोर कारावास से या एक लाख तक के जुर्माने से अथवा दोनों से दंडनीय होगा। साथ ही अधिनियम की धारा 10 के तहत बाल विवाह का अनुष्ठान करने के लिए भी दंड का प्रावधान है। इसके अनुसार जो कोई किसी बाल विवाह को सम्पन्न करेगा, संचालित करेगा या निर्दिष्ट करेगा या दुष्प्रेरित करेगा, वह जब तक यह साबित न कर दे कि उसके पास यह विश्वास करने का कारण था कि वह विवाह बाल-विवाह नहीं था, दो वर्ष तक के कठोर कारावास से या एक लाख तक के जुर्माने से अथवा दोनों से दंडनीय होगा।
साथ ही अधिनियम के अनुसार जहां कोई बालक बाल-विवाह करेगा, वहाँ ऐसा कोई व्यक्ति, जिस पर बालक की ज़िम्मेदारी है, चाहे वह माता-पिता अथवा संरक्षक हों, या अन्य कोई व्यक्ति, जिसमें किसी संगठन का सदस्य या व्यक्ति समूह शामिल है, वह कोई ऐसा कार्य करता है, जिससे बाल-विवाह को बढ़ावा या अनुमति मिले या वह ऐसे बाल- विवाह को रोकने में लापरवाही दिखाता है और विवाह रोक नहीं पाता तथा बाल विवाह में उपस्थित रहता है और अपना सहयोग देता है, वह दो वर्ष तक के कठोर कारावास से या एक लाख तक के जुर्माने से अथवा दोनों से दंडनीय होगा।
