-सुभाष शर्मा
उदयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अब भ्रष्टाचारियों का ढाल बन गया है। एसीबी की ओर से बुधवार को जारी आदेशों से तो यही लगता है। अब एसीबी की ओर से रिश्वत लेते पकड़े जाने वालों का मीडिया को न नाम बताया जाएगा और न ही फोटो लेने देंगे। इससे भ्रष्टाचार करने वाले ज्यादा बेखौफ हो जाएंगे। महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार ग्रहण करने के बाद डीजी आईपीएस हेमंत प्रियदर्शी के जारी पहले आदेश से कंट्रोवर्सी पैदा हो गई है।
दरअसल आदेश में यह कहा गया है कि न्यायालय से आरोप साबित नहीं होने तक रिश्वत लेने वाले लोगों का नाम और फोटो सार्वजनिक नहीं किया जाए। अब मीडिया को उनका नाम और फोटो नहीं दिया जाएगा। इस आदेश पर लोगों का कहना है कि अगर आरोप साबित होने की बात है तो यह तमाम अपराधों पर लागू होती है। फिर तो चोर, डकैत, मर्डर करने वालों के नाम भी तब तक सार्वजनिक नहीं होना चाहिए, जब तक उन पर आरोप साबित नहीं हो जाता। उनका कहना है कि एसीबी के इस आदेश से रिश्वत लेने वालों के हौसले बुलंद होंगे, क्योंकि लोगों को समाज में बदनामी का डर होता हैं और वह अपराध करने से डरते हैं। एसीबी के नए आदेश के बाद भ्रष्टाचारियों में इस बात का डर खत्म हो गया तो अपराध और बढ़ेंगे।
वैसे भी राजस्थान में रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले लोगों में सजा पाने का आंकड़ा बेहद ही कम है यानी कि ज्यादातर आरोपित बरी हो जाते हैं । लंबे समय तक चलने वाली ट्रायल का फायदा भी आरोपितों को ही मिलता है। पकड़े जाने के बाद निलंबित रहने पर उन्हें वेतन तो मिलता ही रहता है।
क्या है एसीबी के आदेश :
एसीबी के अतिरिक्त महानिदेशक प्रथम व कार्यवाहक महानिदेशक हेमंत प्रियदर्शी की ओर से सभी एसीबी चौकी प्रभारी व यूनिट प्रभारियों को 4 4 जनवरी को जारी आदेश की पालना करने को कहा है। इस आदेश में लिखा है कि ट्रेप कार्रवाई के बाद जब तक प्रकरण में आरोपी पर न्यायालय में दोषसिद्ध नहीं हो जाता है, तब तक आरोपी का नाम एवं फोटो मीडिया या अन्य किसी सोशल मीडिया में सार्वजनिक (वायरल) नहीं करेगा।
