उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में इस बार भी होली का पर्व पूरे उत्साह, उमंग और रंगों की बौछार के साथ मनाया गया। खासतौर पर जगदीश चौक में हर वर्ष की तरह इस बार भी युवाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही चौक रंग-बिरंगे गुलाल और हंसी-ठिठोली से सराबोर नजर आया।
जगदीश मंदिर की सीढ़ियों से लेकर चौक के चारों ओर स्थित होटलों की छतों और खिड़कियों तक लोग इस रंगोत्सव के साक्षी बने। हिंदी और पंजाबी गीतों की धुन पर युवा झूमते नजर आए। ढोल-नगाड़ों की थाप और डीजे की मस्ती भरी धुनों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। हर कोई एक-दूसरे को रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं दी ।

उदयपुर में पर्यटन सीजन के चलते देश-विदेश से आए पर्यटकों ने भी इस रंगोत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विदेशी सैलानी पारंपरिक भारतीय अंदाज में गुलाल लगाकर होली का आनंद लेते दिखे। कई पर्यटक मोबाइल कैमरों में इस अद्भुत नजारे को कैद करते नजर आए, तो कई खुद रंगों में सराबोर होकर स्थानीय युवाओं के साथ थिरकते रहे।
जगदीश मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र रंगों की बौछार से पूरी तरह रंगीन हो गया। हवा में उड़ता गुलाल और चारों ओर गूंजती हंसी इस बात का प्रमाण थी कि उदयपुर में होली सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि उत्सव का प्रतीक है।
ट्रैफिक व्यवस्था और पुलिस की निगरानी
भारी भीड़ के कारण जगदीश चौक की ओर जाने वाले मार्गों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति भी बनी रही। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम कर रखे थे। मौके पर पुलिस जाब्ता तैनात रहा, जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर बनाए हुए था।
प्रशासन की सतर्कता के चलते पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। पुलिस अधिकारियों ने भी मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्था की मॉनिटरिंग की।
जनप्रतिनिधियों ने भी मनाई होली
उदयपुर में होली के इस उल्लास में जनप्रतिनिधि भी पीछे नहीं रहे। गुलाबचंद कटारिया ने भी शहर में होली खेली। नगर निगम ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने सामूहिक शोक परिवारों को ढांढस बंधाया और इसके बाद विभिन्न इलाकों में होली के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। डा. मन्नालाल रावत ने कार्यकर्ताओं के साथ ढोल बजाकर होली का आनंद लिया। उन्होंने पारंपरिक अंदाज में रंग लगाकर शुभकामनाएं दीं और कार्यकर्ताओं के साथ जमकर नृत्य किया।
रंगों से सराबोर हुआ शहर
उदयपुर शहर में जगह-जगह होली मिलन समारोह आयोजित किए गए। कॉलोनियों और मोहल्लों में लोगों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
जगदीश चौक का नजारा इस बात का प्रतीक रहा कि उदयपुर में होली केवल एक पारंपरिक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का जीवंत उदाहरण है। रंगों की इस बौछार ने पूरे शहर को एक सूत्र में पिरो दिया और आपसी प्रेम, भाईचारे और आनंद का संदेश दिया।
