उदयपुर। सेक्टर 4 श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी डॉ. संयमलता म. सा.,डॉ. अमितप्रज्ञा म. सा., कमलप्रज्ञाम. सा., सौरभप्रज्ञा म.सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में धर्म सभा को संबोधित करते हुए साध्वी संयमलता ने कहा कि विवेक के साथ वर्तमान में जीने वाला ही सुखी जीवन जी सकता है। हमें तो वर्तमान में ही जीना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भविष्य की समस्याओं का समाधान वर्तमान में नहीं खोजना चाहिए। पुण्य पाप में तथा जो होने का है, वह तो होगा ही, ऐसी श्रद्धा रखनी चाहिए। सुखी मानव तो वही है जो समता से जीवन जिए। आज का स्वागत करें यही जीवन का सार है। जीवन में जो कुछ भी करें उसे बस होश पूर्वक करें, अर्थात केवल वर्तमान में जिए, क्योंकि अतीत बीत गया और भविष्य अजन्मा। मनुष्य की पकड़ में केवल वर्तमान होता है। वर्तमान को जो सफल कर लेता है वह वीर कहलाता है।
साध्वी अमितप्रज्ञा ने कहा मन चंचल है। मन को जीतना नहीं,जीना है। क्योंकि जीतने की भाषा लड़ाई की भाषा है, युद्ध की भाषा है । मन को स्वतंत्र छोड़ दो। मन को रुकोगे तो भागेगा, मन को पकड़ोगे तो दौड़ेगा। मन से हारा व्यक्ति आत्महत्या जैसा घृणित कार्य करने के लिए तत्पर हो जाता है परंतु आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है।
सुखी मानव तो वही,जो समता से जीवन जिएं-साध्वी डॉ संयमलता
