विद्युत निगमों के निजीकरण के विरोध में तेज हुआ आंदोलन, कपूरचंद ने दी बड़ी चेतावनी

उदयपुर। अजमेर विद्युत वितरण निगम श्रमिक संघ (उदयपुर) के महामंत्री कपूरचंद ने विद्युत निगमों में चल रही निजीकरण प्रक्रिया के विरोध में राज्य सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए जोरदार आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि संगठन लगातार कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन अब तक सरकार और विभाग की ओर से कोई ठोस एवं संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है।
कपूरचंद ने बताया कि संगठन द्वारा पूर्व में भी शासन को ज्ञापन सौंपकर कर्मचारियों की विभिन्न मांगों के साथ-साथ निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की गई थी। उन्होंने याद दिलाया कि 12 अगस्त 2025 को ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इन मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश आज तक उन वादों पर अमल नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि 26 दिसंबर 2025 को आयोजित विशाल श्रमिक आक्रोश रैली एवं सभा के माध्यम से भी राज्य सरकार को कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं से अवगत कराया गया था, इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी और असंतोष व्याप्त है। महामंत्री कपूरचंद ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में विद्युत निगमों, विशेषकर डिस्कॉम में निजीकरण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। इससे हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कर्मचारियों के सामने रोजगार असुरक्षा और आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए बुधवार को द्वितीय चरण में सैकड़ों की संख्या में नारेबाज़ी कर अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक जयपुर को अधीक्षण अभियन्ता उदयपुर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया है। प्रदेश भारतीय मज़दूर संघ के उप महामंत्री विजय सिंह वाघेला, डिस्कॉम के अध्यक्ष हेमराज डागी, पेंशनर्स के प्रदेश मंत्री भरत किशोर सूहालका, उदयपुर ज़िले के अध्यक्ष पुरुषोतम कलाल के जिला मंत्री हेमंत एवं सभी शाखाओं के अध्यक्ष सचिव कोषाध्यक्ष एवं समस्त कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही निजीकरण प्रक्रिया पर रोक लगाकर कर्मचारियों की जायज मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। इस आंदोलन के तहत 20 मई 2026 से निगम मुख्यालय स्तर पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। कपूरचंद ने बताया कि यदि इसके बाद भी सरकार कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो 10 जून 2026 को जयपुर स्थित विद्युत भवन पर विशाल आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की औद्योगिक अशांति की पूरी जिम्मेदारी विद्युत प्रशासन और राज्य सरकार की होगी। अंत में उन्होंने सरकार से पुनः अपील की कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और लंबित मांगों का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि प्रदेश में श्रमिकों के बीच व्याप्त असंतोष को दूर किया जा सके।

By Udaipurviews

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