-डीएमएफ का अध्यक्ष लोकसभा सांसद को नियुक्त करने की भी मांग की
उदयपुर। सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने प्रतापगढ कलेक्टर द्वारा डीएमएफ बैठक में मंजूर कामों को रोकने का मुद्दा शुक्रवार को संसद में उठाया। डॉ रावत ने कहा कि इस प्रकरण की जांच करवाई जाए तथा सभी जगहों पर डीएमएफ का अध्यक्ष सांसद को नियुक्त किया जाए, ताकि जरुरत के कामों का प्राथमिकता के आधार पर तुरंत निर्णय किया जा सके।
सांसद डॉ रावत ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान यह महत्वपूर्ण मामला उठाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत 2047 का सपना लेकर चल रहे हैं और यह हम सभी के लिए बहुत अनुकरणीय भी है। रिफार्म, परफॉर्म व टांसफोर्म की बडी रणनीति के तहत काम हो रहा है। इसी सूत्र के परिणाम स्वरुप केएमडीआर 2015 में संशोधन करते हुए डीएमएफ का गठन किया गया और इसको लागू करने के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक गवर्निंग काउंसिल गठित हुई। डीएमएफ के तहत ही भारत सरकार ने खनिज क्षेत्र कल्याण योजना लागू की और उसकी कार्यकारी एजेंसी भी कलेक्टर की अध्यक्षता में है। सांसद डॉ रावत ने कहा कि उनकी लोकसभा में चार डीएमएफ है जिसमें से प्रतापगढ का जो डीएमएफ है उसमें 54 तरह के काम एक बैठक में स्वीकृत किए गए। इन सभी 54 कामों को शिक्षा व अन्य कार्यों के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए राजस्थान सरकार ने वित्तीय स्वीकृति भी जारी कर दी कि यह काम होने चाहिए। सांसद डॉ रावत ने कहा कि प्रतापगढ कलेक्टर ने अपने दंभ और अहंकार के कारण 54 में से केवल 3 ही काम स्वीकृत किए। डॉ रावत ने कहा कि ऐसा होता है तो प्रधानममंत्री का सपना पूरा नहीं हो पाएगा। उन्होंने आग्रह किया कि डीएमएफ का अध्यक्ष लोकसभा सांसद को बनाया जाए तथा दूसरा इस प्रकरण की जांच भी की जाए। साथ ही जो 54 काम जो गवर्निंग कॉउन्सिल ने स्वीकृत किए है उन्हें धरातल पर उतारा जाए ताकि जर्जर हो रहे स्कूल भवन ठीक हो और पेयजल बस्तियों पर पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही खनिज क्षेत्र जो नकारात्मक तरीके से प्रभावित हुआ वहां के क्षेत्रवासियों को राहत मिले।
सांसद डॉ रावत ने प्रतापगढ कलेक्टर द्वारा डीएमएफ के काम रोकने का मुद्दा संसद में उठाया, जांच की मांग की
