मेवाड महोत्सव में शामिल होने के लिए पहुंचे देशी—विदेशी पर्यटक
शाही गणगौर की सवारी होती है आकर्षण का केन्द्र
उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में तीन दिवसीय गणगौर महोत्सव का आगाज शनिवार को हो गया। पहले दिन दोपहर बाद से मेवाड़ महोत्सव की रंगत ओल्ड सिटी में देखने को मिली और शाम को अलग— अलग समाजों की महिलाएं गणगौर को सिर पर धारण सवारी के रूप में गणगौर घाट पर पहुंची। इससे पहले जगदीश चौक पर महिलाओं ने गणगौर के साथ नृत्य भी किया जो कि आकर्षण का केन्द्र रहा।
राजसी ठाट-बाट के साथ पिछोला झील की लहरों के संग मधुर स्वर लहरियों के बीच निकली गणगौर की सवारी ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। जगदीश चौक पर गणगौर की सवारी के आगे कई कलाकार चल रहे थे जो हैरतअंगेज करतब दिखाते हुए आगे बढ़े। विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में साथ चल रहे थे और वे गणगौर लेकर चल रही महिलाओं और बालिकाओं के साथ फोटो खिंचवा रहे हैं।
मेवाड़ महोत्सव के पहले दिन ही शहरवासियों में अपूर्व उत्साह व उमंग के साथ रील्स एवं वीडियो बनाने की विशेष होड़ देखी गई। उत्साह और उमंग के इस खुबसूरत माहौल के बीच हर कोई अपने कैमरा-मोबाइल में व्यस्त दिखा।
शनिवा शाम गणगौर घाट पर लोक संस्कृति का अनूठा संगम दिखा। अपनी कला का प्रदर्शन करते लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोहा। पिछोला झील के किनारे इस आयोजन के अनूठे संगम ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर आतिशबाजी भी की गई।
गणगौर घाट पर की गई विशेष व्यवस्थाएं
तीन दिवसीय महोत्सव के तहत गणगौर घाट पर गणगौर के पूजन के लिए आने वाली महिलाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी गणगौर घाट पर अच्छी खासी भीड रही। इससे पहले जगदीश चौक से गणगौर घाट पर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को बंद कर दिया गया।
यातायात विभाग के किया रूट डायवर्ट
शहर में गणगौर घाट तक पहुंचने वाले सभी प्रमुख मार्गो के लिए शनिवार को यातायात विभाग ने रूट को डायवर्ट किया। शनिवार को गणगौर की सवारी शुरू होने के साथ ही सभी मार्गो पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई। जिससे महिलाओं को गणगौर को सिर पर धारण कर चलने में परेशानी का सामना नहीं करना पडा।
गोगुंदा में तीन दिवसीय गणगौर मेला शुरू, निकली गणगौर की सवारी
मेवाड़ अंचल में आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के प्रतीक गणगौर पर्व के अवसर पर गोगुंदा कस्बे में तीन दिवसीय गणगौर मेले का शुभारंभ शनिवार से हो गया। मेवाड़ महोत्सव के तहत आयोजित इस मेले को लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह देखा जा रहा है और पूरा कस्बा उत्सव के रंग में रंगा नजर आ रहा है। गणगौर मेला मेवाड़ की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। मेले के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गणगौर की पूजा-अर्चना, भव्य शोभायात्रा कस्बे के विभिन्न मार्गो से होते हुए बस स्टैंड स्थित गंगौर घाट पहुंची। मेले का मुख्य आकर्षण पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं द्वारा सिर पर गणगौर की प्रतिमाएं रखकर निकाली जाने वाली शोभायात्रा रहेगी। महिलाएं लोकगीत गाते हुए इस शोभायात्रा में भाग लेंगी, जो मेवाड़ की जीवंत सांस्कृतिक छवि को प्रदर्शित करेगी।
तीन दिवसीय गणगौर महोत्सव का आगाज
