उदयपुर। आगामी शोक निवारण होली को लेकर श्री बिलोचिस्तान पंचायत की कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक शक्ति नगर स्थित श्री बिलोचिस्तान भवन में आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तय की गई तथा समाज के अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।
पंचायत के महासचिव विजय आहुजा ने बताया कि बैठक में निर्णय लिया गया कि धुलेण्डी पर्व के अवसर पर समाज के उन परिवारों के लिए, जिनके यहां गत वर्ष में शोक की स्थिति रही है, पारंपरिक शोक निवारण होली का आयोजन 3 मार्च 2026, मंगलवार को प्रातः 10 बजे श्री बिलोचिस्तान भवन के बाहर किया जाएगा। महिलाओं के लिए अलग से शोक निवारण होली 28 फरवरी 2026, शनिवार को सायं 4:30 से 5:30 बजे तक भवन परिसर में आयोजित की जाएगी।
दशकों पुरानी परंपरा, हजारों की उपस्थिति उदयपुर का बिलोची सिंधी समाज शोक निवारण होली को दशकों पुराने पारंपरिक अंदाज में मनाता है। इस अवसर पर हजारों की संख्या में समाजजन एक ही स्थान पर एकत्रित होते हैं। श्री बिलोचिस्तान पंचायत के अध्यक्ष नानकराम कस्तूरी ने बताया कि पहले समाज के पदाधिकारी शोक संतप्त परिवारों के घर-घर जाकर शोक निवारण की रस्म निभाते थे, लेकिन लगभग 31 वर्ष पूर्व उदयपुर की समस्त सिंधी पंचायतों की बैठक में इसे सामूहिक रूप से एक स्थान पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया। चूंकि समाज के लोग शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निवास करते हैं, इसलिए घर-घर जाकर कार्यक्रम करना कठिन हो रहा था। सभी पंचायतों की सहमति से शक्ति नगर स्थित बिलोचिस्तान भवन के बाहर सामूहिक आयोजन की परंपरा प्रारंभ हुई, जो आज भी निरंतर जारी है।
श्री सनातन धर्म सेवा समिति के हेमंत गखरेजा बताया कि ऐसे मनाई जाती है शोक निवारण होली इस विशेष होली में वर्षभर में जिन परिवारों में किसी सदस्य का निधन हुआ है, वे एक कतार में बैठते हैं। शुभ मुहूर्त में पंडित, समाज की विभिन्न पंचायतों के पदाधिकारी तथा समाजजन क्रमबद्ध रूप से शोक संतप्त परिवारों के पास जाकर हर्बल गुलाल का तिलक लगाते हैं और उन्हें सांत्वना प्रदान करते हैं। इस दौरान भजन-कीर्तन का आयोजन भी होता है, जिससे वातावरण आध्यात्मिक और भावनात्मक बन जाता है।
पंचायत के उपाध्यक्ष जितेंद्र तलरेजा ने बताया कि तिलक कार्यक्रम के उपरांत समाज के लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं और अंत में प्रसाद वितरण किया जाता है।
क्यों मनाई जाती है शोक निवारण होली
पंचायत उपाध्यक्ष गुरमुख कस्तूरी ने बताया कि समाजजनों के अनुसार इस परंपरा के पीछे गहरी भावनात्मक भावना जुड़ी है। जिन परिवारों में किसी सदस्य का निधन हो जाता है, वे पूरे वर्ष तक कोई उत्सव या खुशियां नहीं मनाते। पहले जब समाजजन घर-घर जाकर शोक निवारण करते थे, तब यह माना जाता था कि इस रस्म के बाद शोक संतप्त परिवार पुनः सामाजिक जीवन और उत्सवों में सहभागी हो सकता है। समय के साथ यह परंपरा सामूहिक रूप में बदल गई, लेकिन इसकी भावना आज भी वही है—दुख की घड़ी में साथ खड़े रहना और होली के माध्यम से जीवन में पुनः रंग भरने का संदेश देना।
पंचायत पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि समस्त सिंधी एवं बिलोची पंचायतों के सहयोग से सभी आयोजन गरिमामय, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न होंगे।
पंचायत ने समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि वे शोक निवारण होली एवं अन्य आयोजनों में उपस्थित रहकर सामाजिक एकता, संवेदनशीलता और परंपराओं को सशक्त बनाने में सहभागिता निभाएं।
बैठक में रमेश तलदार, नरेंद्र क्थूरिया, महेंद्र तलदार,प्रदीप अछपाल, नरेंद्र तलरेजा, बाबू कतेजा, राजकुमार डोडेजा, प्रकाश फुलानी, होलाराम छोड़ा आदि ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपने विचार रखें ।
