उदयपुर के राजनीतिक आदर्श से जुडी एक अतीत स्मृति

 जब अल्पसंख्यक कांग्रेस पार्षद  प्रस्ताव पर नगर निगम ने किया सरसंघचालक गुरुजी का नागरिक अभिनंदन 
(संघ शताब्दी वर्ष में गुरुजी गोलवलकर की जयन्ती 19 फरवरी पर विशेष)
वर्तमान में राजनीति क्षैत्र में जहां परस्पर आरोप- प्रत्यारोप, दोषारोपण, चरित्र हनन व उठा-पटक जैसे उदाहरण आमतौर चर्चा में रहते है, वहीं इसके विरुद्ध उदयपुर की धरती पर 61वर्ष पूर्व 1 दिसम्बर 1965 को हुआ नगर निगम का एक आयोजन राजनीतिक सहिष्णुता का अनुपम उदाहरण है।
बात 1965 की है, जब उदयपुर नगर निगम ( उसका तत्कालीन नाम उदयपुर सिटी कार्पोरेशन) था। निगम में भारतीय  जनसंघ का बोर्ड था। बोर्ड में जनसंघ के मदनलाल धुप्पड़ सभापति व भानुकुमार शास्त्री उपसभापति थे। दोनों ने विचार करके संघ के तत्कालीन सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्रीगुरुजी के समक्ष नगर निगम द्वारा उनके नागरिक अभिनंदन का प्रस्ताव रखा। श्रीगुरुजी सामान्यतः स्वागत अभिनंदन व फोटोग्राफी से परहेज रखते थे। लेकिन उन्होनें इस आयोजन के लिये अपनी सशर्त स्वीकृति दी- ‘यदि बोर्ड आयोजन के लिये सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करे, तो वो अवश्य आयेगें’ । शर्त पूर्ण होना कठिन था, इसलिये संभवतः श्रीगुरुजी भी निश्चिंत रहे होगें। लेकिन सभापति धुप्पड़ व उपसभापति शास्त्री ने बोर्ड से यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित करवा लिया। इसमें भी विशेष उल्लेखनीय बिंदु यह भी है कि यह प्रस्ताव कांग्रेस में अल्पसंख्यक वर्ग के पार्षद मोहम्मद हुसैन हैदरी ने रखा, जिसे बोर्ड ने पारित किया। 1 दिसम्बर 1965 को सहेलियों की बाड़ी में यह आयोजन हुआ। समारोह में संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. आबाजी थत्ते व मेवाड़ महामंडलेश्वर मुरलीमनोहर शरण सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे। यह समारोह उदयपुर के राजनेताओं की वैचारिक परिपक्वता, उदारता व सहिष्णुता का उदाहरण है व भावी पीढियों के लिये पाथेय है
-डॉ. विजय विप्लवी, उदयपुर
By Udaipurviews

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