सरकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं की सामूहिक भूमिका पीड़ितों के बचाव, पुनर्वास एवं दोषियों की पहचान में मददगार
(बंधुआ मजदूरी उन्मूलन, मानव दुर्व्यापार एवं बाल संरक्षण कानूनों पर संवेदीकरण प्रशिक्षण संपन्न)
प्रतापगढ़ । बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 की 50वीं वर्षगांठ (9 फरवरी ) पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रतापगढ़ एवं गायत्री सेवा संस्थान, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में सरकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं का एक दिवसीय संवेदीकरण एवं क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सभागार में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव केदारनाथ ने कहा कि राजस्थान प्रदेश में सरकार एवं पुलिस विभाग की सक्रियता के चलते विगत वर्षों में बंधुआ श्रमिक प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 एवं मानव दुर्व्यापार से संबंधित कानूनों के अंतर्गत प्रभावी कार्रवाई की गई है। कई मामलों में बंधुआ मुक्ति प्रमाण पत्र जारी कर पीड़ितों के पुनर्वास हेतु ठोस कदम उठाए गए हैं। परंतु समाज से इस कलंक को पूर्णतः समाप्त करने के लिए सामूहिक एवं सतत प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न हितधारकों की समन्वित भूमिका पीड़ितों के बचाव, पुनर्वास एवं दोषियों की पहचान में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक एवं बाल अधिकार विशेषज्ञ डॉ. शैलेन्द्र पण्ड्या ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के आधार पर राजस्थान में मानव दुर्व्यापार एवं बंधुआ मजदूरी से संबंधित चुनौतियों, सरकारी प्रयासों एवं विभागीय समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बंधुआ श्रमिक अधिनियम के अंतर्गत पीड़ितों को विशेष आर्थिक सहायता एवं पुनर्वास का प्रावधान है, जिसका प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।
विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त जिला कलेक्टर विजेश पंड्या ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु आमजन की जागरूकता अनिवार्य है। मानव तस्करी या बंधुआ मजदूरी की किसी भी सूचना पर प्रशासन एवं पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए “Asha – 100 Days Campaign” के संदर्भ में भी जानकारी प्रदान की गई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी मानक परिचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप जागरूकता, समर्थन, सहायता एवं कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु 100 दिवसीय कार्ययोजना तैयार की गई है। उक्त कार्ययोजना के प्रभावी जमीनी क्रियान्वयन के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रतापगढ़ द्वारा बाल संरक्षण कानूनों एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों पर Capacity Building एवं Refresher Training Programme आयोजित किया गया।
विषय विशेषज्ञ के रूप में इंटरनेशनल जस्टिस मिशन के प्रतिनिधि अधिवक्ता जॉन जेम्स ने बंधुआ श्रमिक प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 तथा मानव दुर्व्यापार से संबंधित कानूनी प्रावधानों एवं योजनाओं की जानकारी दी।
इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण इकाई के उपनिदेशक उमेद अली, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक डॉ. टी.आर. आमेटा, बाल कल्याण समिति प्रतापगढ़ के अध्यक्ष मुकेश नागदा एवं विशेषज्ञ मामूनी खान ने रेस्क्यू अभियानों, पीड़ितों को प्राप्त मुआवजे एवं पुनर्वास लाभों की जानकारी साझा की।
कार्यशाला में बंधुआ श्रमिक विषय पर आधारित लघु फिल्म “राइस फैक्ट्री” का प्रदर्शन किया गया, जिसके माध्यम से बंधुआ श्रमिक की पहचान के संकेतकों एवं रिपोर्टिंग की गोपनीयता के महत्व को स्पष्ट किया गया।
कार्यक्रम के दौरान केस स्टडी, संवाद सत्र एवं कानूनी प्रक्रियाओं पर खुली चर्चा आयोजित की गई। प्रतिभागियों को समाज में जागरूकता फैलाने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में जिले के विभिन्न विभागों, पुलिस विभाग, चाइल्डलाइन एवं गायत्री सेवा संस्थान के प्रतिनिधि अमित राव, अंतिम बाला, अम्बा लाल पूजा राजपूत उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन आशिता जैन द्वारा किया गया एवं धन्यवाद ज्ञापन गायत्री सेवा संस्थान के जिला समन्वयक रामचन्द्र मेघवाल ने प्रस्तुत किया।
कानूनी जागरूकता और सामूहिक प्रयास से ही मिटेगा बंधुआ मजदूरी का कलंक – केदारनाथ
