उदयपुर। 11 फरवरी। राजस्थान सरकार के बजट 2026-27 पर उदयपुर देहात एवं शहर जिला कांग्रेस ने वक्तव्य जारी कर राजस्थान सरकार के बजट को पूरी तरह दिशाहीन एवं आंकड़ों की बाजीगरी कहा है।
उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि यह बजट युवाओं को रोजगार नहीं देता, किसानों को राहत नहीं देता, महंगाई से परेशान आम आदमी को कोई सहारा नहीं देता। केवल घोषणाओं का ढोल पीटा गया है, लेकिन धरातल पर काम का कोई भरोसा नहीं देता है। पर्ची सरकार का यह बजट सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी है, इसमें विकास का कोई रोडमैप ही नहीं है। प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है, किसान कर्ज में डूबा है, महिलाएं असुरक्षित हैं और कानून व्यवस्था कमजोर है लेकिन पर्ची सरकार को जनता की पीड़ा नहीं दिखाई दे रही। महंगाई से त्रस्त राजस्थान की जनता पर्ची सरकार से पेट्रोल-डीजल पर वेट कम कर पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में राहत की उम्मीद कर रही थी लेकिन पर्ची सरकार ने पेट्रोल-डीज़ल में वेट कम नहीं कर आमजनता की उम्मीद को तोड़ दिया। जबकि इसी जुमले को विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाकर जनता को बरगलाया गया था पर अब प्रदेश की जनता पर्ची सरकार के झूठ और जुमलों को समझ चुकी है और समय आने पर पर्ची सरकार को आईना दिखाएगी। यह बजट राजस्थान की जनता के साथ सीधा विश्वासघात है।
उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने बजट पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि पर्ची सरकार का बजट हर बार की तरह इस बार भी कागजों तक सिमटी हुई घोषणाओं का पुलिंदा है। बजट को लेकर हर वर्ग को उम्मीद थी, लेकिन वह भी निराशा में ही तब्दील हो गई। निवेश प्रोत्साहन के नाम पर सरकार ने सिर्फ प्रचार किया है, परंतु ज़मीनी स्तर पर निवेश होता दिख नहीं रहा है। कृषि आय में बढ़ोतरी के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। युवाओं के स्वावलंबन के लिए जो घोषणाएं की गई हैं, उनकी पूर्ति और पहले की घोषणाओं का डाटा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। कुल मिलकर पर्ची सरकार का यह बजट पूरी तरह से दिशाहीन एवं जनविरोधी है।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग कोऑर्डिनेटर डॉ संजीव राजपुरोहित ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पर्ची सरकार द्वारा दिए गए पिछले तीन बजट में 2718 से अधिक घोषणाएं करी गई थी जिनमें से सिर्फ 750 घोषणाएं (लगभग 27 प्रतिशत) ही पूरी हो पाई है। 707 घोषणाएं (26 प्रतिशत)तो ऐसी करी गई जिनको आज तक छुआ भी नहीं गया है। इस बार भी सिर्फ जुमला बजट दिया गया है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि विकास कार्यों, सड़कों, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। यह बजट प्रदेश का विकास दस्तावेज नहीं बल्कि पर्ची सरकार की विफलता को छुपाने वाला “आंकड़ों का पर्दा” है।
