गंगाजल कलशों से आज मंगलमय होगा वागड़ पावागढ़ धाम का पर्वत
बड़ोदिया (बांसवाड़ा) वागड़ के पावागढ़ के नाम से विख्यात देवी तीर्थ नंदनी माता मंदिर में सकल सनातनी समाज एवं नंदनी माता तीर्थ विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय शिखर प्रतिष्ठा एवं 51 कुंडीय शतचंडी महायज्ञ, लघुरुद्र व भैरव महायाग का शुभारंभ बुधवार को विधिविधान से हुआ।
विकास समिति के भूपेश पटेल व मुदित जोशी ने बताया कि आचार्य किशोर शुक्ला के सानिध्य में प्रधान कुंड के यजमान अशोक पुत्र हिरालाल प्रजापत, शिखर यजमान रूपेंग सोलंकी पुत्र लवजी सोलंकी सपरिवार, कीर्ति स्तंभ यजमान नितेश कलाल पुत्र छगनलाल कलाल, शिखर ध्वज दंड यजमान दली धर्मपत्नी प्रेमजी पाटीदार, भैरवजी ध्वज दंड यजमान पुरुषोत्तम सुथार पुत्र वखतराम सुथार, सिंह वाहन यजमान डॉ. विवेकानंद महाराज, गणेश मूर्ति स्थापना यजमान पन्नालाल सुथार पुत्र वखतराम सुथार परिवार, घंटा वादन यजमान लालसिंह सोलंकी पुत्र नारेंग सोलंकी, श्री यंत्र स्थापना यजमान सुरेशचंद्र सुथार पुत्र भुरालाल सुथार परिवार सहित समस्त यजमान परिवारों की उपस्थिति में अनुष्ठान संपन्न हुए।
प्रातःकाल विट्ठल देव स्थित जलाशय पर हिमाद्रि संकल्प, दशविधि स्नान, यज्ञोपवीत धारण, प्रायश्चित होम के पश्चात मंडप प्रवेश किया गया। इसके बाद गणपति पूजन, मातृका पूजन, स्वस्तिवाचन, पुण्याहवाचन, वर्धनी पूजन, स्थापित देवताओं का पूजन, कुंड पूजन एवं अग्नि स्थापना कर नवग्रह व रुद्र पूजन किया गया। ग्रह होम के पश्चात आरती संपन्न हुई।
इस अवसर पर आचार्य किशोर शुक्ला (बड़ोदिया), उपाचार्य कपिल व्यास (पालोदा), प्रतिष्ठा आचार्य पंकज जोशी, राहुल जोशी, हरिओम पाठक, ललित जोशी, संदीप पाठक सहित कुल 65 ब्राह्मणों का सानिध्य रहा।
प्रथम दिवस पर श्रद्धालुओं के लिए भामाशाह दीपक ठाकुर पुत्र किशनलाल ठाकुर परिवार द्वारा महाप्रसादी का आयोजन किया गया।
आज मातृशक्ति के नाम रहेगा पर्व
विकास समिति के विठ्ठल पाटीदार व दीपक ठाकुर ने बताया कि गुरुवार को मातृशक्ति गंगाजल से भरे कलश लेकर लगभग 1500 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित मंदिर शिखर तक पहुंचेगी। व्यवस्था के तहत भीड़ नियंत्रण व सुविधा हेतु विशेष टीमें गठित की गई हैं।
हाईवे मार्ग से लगभग 3500 कलश, जबकि चौखला मार्ग की सीढ़ियों से 1500 से 2000 महिलाएं कलश लेकर पर्वत शिखर तक पहुंचेंगी।
रोशनी व गुब्बारों से सजा मां का मंदिर
पिछले दो दिनों से समिति सदस्यों द्वारा नवनिर्मित पाषाण मंदिर को रोशनी व गुब्बारों से दुल्हन की तरह सजाया गया है। प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह तक की सजावट और रत्नों से श्रृंगारित मां नंदनी की प्रतिमा श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रही है।
