-सांसद डॉ रावत के सुझाव पर जनजाति उन्नत ग्राम अभियान में प्रत्येक गांव का प्लान ग्राम सभा में होगा तैयार
-लोकसभा अध्यक्ष व जनजाति कार्य मंत्री ने सुझाव को बेहतर बताया
-राजस्थान में भी 30 जिलों में 208 ब्लॉकों के 6019 ग्रामों में यह अभियान
उदयपुर। धरती आबा जनजाति उन्नत ग्राम अभियान के अंतर्गत विकसित भारत में, विकसित जनजाति ग्राम अभियान भी चलेगा जिसमें प्रत्येक विकसित ग्राम का प्लान ग्राम सभा में तैयार होगा। इसके लिए अलग से ग्राम सभाओं का आयोजन होगा।
लोकसभा में गुरुवार को सांसद डॉ मन्नालाल रावत की ओर से तारांकित प्रश्न के दौरान यह सुझाव रखा गया था जिस पर जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने बताया कि सरकार इस सुझाव पर काम करेगी। उन्होंने बताया कि विकसित भारत में विकसित जनजाति ग्राम हेतु भारती आवास जनजाति उन्नत ग्राम अभियान में 63000 से अधिक जनजाति बाहुल्य गांव शामिल किए गए हैं। राजस्थान में भी 30 जिलों में 208 ब्लॉकों के 6019 ग्रामों में यह जनजाति उन्नत ग्राम अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भौतिक सुविधा एवं मानव संसाधन विकास के शत प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त करना है।
सांसद डॉ रावत के प्रश्न पर जनजातीय कार्य मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर, 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) का शुभारंभ किया। इस अभियान में 17 लाइन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित किए गए 25 उपाय शामिल हैं और इसका लक्ष्य अजजा बहुल गांवों या आकांक्षी जिलों में अवसंरचना और मानव विकास के अंतरों (कमियों) को पूरा करके जनजातीय समुदायों का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास करना है। इस अभियान के उद्देश्यों में अन्य बातों के साथ-साथ, जनजातीय आबादी के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, पीने के पानी, आवास, आजीविका और अवसंरचना तक पहुंच में सुधार करना, मंत्रालयों की मौजूदा योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से सामाजिक अवसंरचना, स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूली शिक्षा, संपर्क (कनेक्टिविटी), कौशल विकास और आजीविका सहायता में कमियों को संतृप्त करना शामिल है।
इस अभियान के तहत देश भर के 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों में 2,911 ब्लॉकों में कुल 63,843 जनजातीय गांवों को कवर किया गया है। इस देश भर में पांच सालों के लिए कुल बजट 79,156 करोड़ रूपये (केंद्र का 56,333 करोड़ रूपये राज्यों का हिस्सा 22,823 करोड़ रुपये) है। हर संबंधित मंत्रालय को अभियान के तहत बजट और लक्ष्य दिए गए हैं और वह उसे संौंपे गए उपाय को लागू करने के लिए ज़िम्मेदार है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा राजस्थान राज्य सरकार के प्रस्तावों के आधार पर उदयपुर, सलूंबर, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों में अभियान के तहत कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा, जल शक्ति मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, उदयपुर, सलूंबर, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों के कुल 2038 गांवों में से 1850 गांवों को पीने के पानी की आपूर्ति से संतृप्त किया जा चुका है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने डूंगरपुर जिले में 6076 आवास, प्रतापगढ़ जिले में 2793 आवास, सलूंबर जिले में 9092 आवास और उदयपुर जिले में 2218 आवास मंजूर किए हैं। दूरसंचार विभाग ने डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों में क्रमशः 10.27 और 125 गांवों में मोबाइल संपर्क (कनेक्टिविटी) प्रदान की है।
-राजस्थान में भी 30 जिलों में 208 ब्लॉकों के 6019 ग्रामों में यह अभियान
उदयपुर। धरती आबा जनजाति उन्नत ग्राम अभियान के अंतर्गत विकसित भारत में, विकसित जनजाति ग्राम अभियान भी चलेगा जिसमें प्रत्येक विकसित ग्राम का प्लान ग्राम सभा में तैयार होगा। इसके लिए अलग से ग्राम सभाओं का आयोजन होगा।
लोकसभा में गुरुवार को सांसद डॉ मन्नालाल रावत की ओर से तारांकित प्रश्न के दौरान यह सुझाव रखा गया था जिस पर जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने बताया कि सरकार इस सुझाव पर काम करेगी। उन्होंने बताया कि विकसित भारत में विकसित जनजाति ग्राम हेतु भारती आवास जनजाति उन्नत ग्राम अभियान में 63000 से अधिक जनजाति बाहुल्य गांव शामिल किए गए हैं। राजस्थान में भी 30 जिलों में 208 ब्लॉकों के 6019 ग्रामों में यह जनजाति उन्नत ग्राम अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भौतिक सुविधा एवं मानव संसाधन विकास के शत प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त करना है।
सांसद डॉ रावत के प्रश्न पर जनजातीय कार्य मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर, 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) का शुभारंभ किया। इस अभियान में 17 लाइन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित किए गए 25 उपाय शामिल हैं और इसका लक्ष्य अजजा बहुल गांवों या आकांक्षी जिलों में अवसंरचना और मानव विकास के अंतरों (कमियों) को पूरा करके जनजातीय समुदायों का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास करना है। इस अभियान के उद्देश्यों में अन्य बातों के साथ-साथ, जनजातीय आबादी के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, पीने के पानी, आवास, आजीविका और अवसंरचना तक पहुंच में सुधार करना, मंत्रालयों की मौजूदा योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से सामाजिक अवसंरचना, स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूली शिक्षा, संपर्क (कनेक्टिविटी), कौशल विकास और आजीविका सहायता में कमियों को संतृप्त करना शामिल है।
इस अभियान के तहत देश भर के 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों में 2,911 ब्लॉकों में कुल 63,843 जनजातीय गांवों को कवर किया गया है। इस देश भर में पांच सालों के लिए कुल बजट 79,156 करोड़ रूपये (केंद्र का 56,333 करोड़ रूपये राज्यों का हिस्सा 22,823 करोड़ रुपये) है। हर संबंधित मंत्रालय को अभियान के तहत बजट और लक्ष्य दिए गए हैं और वह उसे संौंपे गए उपाय को लागू करने के लिए ज़िम्मेदार है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा राजस्थान राज्य सरकार के प्रस्तावों के आधार पर उदयपुर, सलूंबर, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों में अभियान के तहत कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा, जल शक्ति मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, उदयपुर, सलूंबर, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों के कुल 2038 गांवों में से 1850 गांवों को पीने के पानी की आपूर्ति से संतृप्त किया जा चुका है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने डूंगरपुर जिले में 6076 आवास, प्रतापगढ़ जिले में 2793 आवास, सलूंबर जिले में 9092 आवास और उदयपुर जिले में 2218 आवास मंजूर किए हैं। दूरसंचार विभाग ने डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों में क्रमशः 10.27 और 125 गांवों में मोबाइल संपर्क (कनेक्टिविटी) प्रदान की है।
