विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने किया संबोधित, पिछड़े एवं उपेक्षित वर्ग और क्षेत्र को लाएं विकास की मुख्य धारा में – पद्मश्री सुश्री निवेदिता दीदी
बांसवाड़ा, 24 दिसम्बर/ विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की अखिल भारतीय उपाध्यक्ष पद्मश्री सुश्री निवेदिता भिड़े ने जनजाति क्षेत्रों में बुनियादी विकास के साथ ही शिक्षा और संस्कार के प्रति जागरुकता पर जोर दिया है और कहा है कि इसके लिए केन्द्र द्वारा विभिन्न गतिविधियों का प्रभावी संचालन किया जा रहा है।
उन्होंने आनन्दालयों के आचार्यों से आनन्दालयों की बहुआयामी रचनात्मक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाते हुए सामाजिक नवनिर्माण में सशक्त भागीदारी का दिग्दर्शन कराने के लिए समर्पित प्रयासों का आह्वान किया है।
केन्द्र उपाध्यक्ष पद्मश्री सुश्री निवेदिता भिड़े ने बांसवाड़ा जिले के छोटा डूंगरा स्थित शान्त सेवा आश्रम की शान्ति सेवा कुटी में आनन्दालयों के आचार्यों की बैठक को संबोधित करते हुए यह उद्गार व्यक्त किए।
विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की पश्चिमी क्षेत्र जनजाति सेवा प्रकल्प के अन्तर्गत बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ एवं सज्जनगढ़ क्षेत्र में संचालित आनन्दालय के आचार्यों की बैठक में क्षेत्र के सभी 66 आनन्दालयों के आचार्य, राजस्थान प्रान्त के प्रतिनिधिगण एवं स्थानीय कार्यकर्त्ता उपस्थित थे।
आचार्यों से किया आह्वान : उन्होंने आचार्यों से पिछड़े और वंचित वर्ग एवं क्षेत्र के लोगों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने, शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार , संस्कार निर्माण, अधिकाधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, मानवीय मूल्य आधारित शिक्षा, पर्यावरण, देशप्रेम और सेवा भावनाओं को विकसित कर श्रेष्ठ नागरिक बनाने और ग्राम्य जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए हरसंभव प्रयत्नों में सहभागिता निभाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को तेज करने का आह्वान किया।
शैक्षणिक सामग्री का वितरण किया : पद्मश्री निवेदिता दीदी ने आनन्दालयों के लिए ब्लेक बोर्ड, मार्कर पेन, दरियां, तिरपाल, कापियां आदि शैक्षणिक, सह शैक्षणिक एवं खेलकूद सामग्री का वितरण किया।
इन्होंने दिए अहम् सुझाव : बैठक में प्रान्त संचालक शकुन्तला दीदी, प्रान्त प्रमुख भगवान सिंह, प्रान्त संगठन शीतल दीदी, भीलवाड़ा सह संचालक डॉ. गंगा विष्णु दिवाकर, भीलवाड़ा नगर प्रमुख भूपेन्द्र जोशी, जयपुर निधि प्रमुख अविनाश पारीक, सह योग प्रमुख (भीलवाड़ा) रवि भांभी, नगर संगठक (दक्षिण, जयपुर नगर), प्रकल्प प्रमुख कान्तिलाल व्यास, सह प्रकल्प प्रमुख जयगिरिराज सिंह चौहान, मीडिया संयोजक दिलीप अधिकारी, व्यवस्था प्रमुख कमलकान्त भट्ट, शान्त सेवा कुटी के ट्रस्टी बापूलाल खज्जा एवं ट्रस्ट मण्डल के सदस्यों ने विचार व्यक्त किए।
दूरदर्शी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन : बैठक में जानकारी दी गई कि आनन्दालय द्वारा संस्कारवान पीढ़ी तैयार करने वनवासी जनजाति क्षेत्र के उपेक्षित एवं वंचित वर्ग एवं क्षेत्र के बच्चों को समुचित शिक्षा-दीक्षा उपलब्ध करवाने और समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करते हुए समग्र विकास के लिए जारी हरसंभव प्रयासों को और अधिक गति प्रदान की जाएगी। इसके लिए ठोस दूरदर्शी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
इस अवसर पर आनन्दालय में आचार्यों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा करते हुए आचार्यों को मुख्य धुरी बताते हुए आनन्दालय की गतिविधियों को व्यापक विस्तार देने पर बल दिया गया।
नई जागृति का संचार हो रहा : इस अवसर पर सन्त रामप्रकाश रामस्नेही महाराज ने अपने प्रेरक उद्बोधन में केन्द्र के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करने का आह्वान किया। उन्हांने आनन्दालयों को शिक्षा एवं संस्कार संवहन एवं चेतना का केन्द्र बताते हुए कहा कि इससे जनजाति क्षेत्रों में नई जागृति का संचार हो रहा है।
आरंभ में शान्त सेवा आश्रम के ट्रस्टी बापूलाल खज्जा एवं ट्रस्ट मण्डल द्वारा निवेदिता दीदी एवं समस्त प्रतिनिधियों व कार्यकर्ताओं का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मन मोहा : आचार्यों ने अपने-अपने आनन्दालय की प्रगति और उपलब्धियों तथा भावी कार्ययोजना के मद्देनज़र संचालित गतिविधियों की जानकारी दी और वागड़ी गीत, भजन एवं नृत्य प्रस्तुत किए।
गैर नृत्य ने किया अभिभूत : आनन्दालय के आचार्यों द्वारा स्थानीय लोक वाद्यों की धुन की आतिशबाजी के साथ पुष्पवर्षा कर निवेदिता दीदी का भव्य स्वागत किया गया। जनजाति अंचल के परम्परागत गैर नृत्य का प्रदर्शन देख विवेकानन्द केन्द्र की राजस्थान प्रान्त टोली अभिभूत हो उठी।
पद्मश्री निवेदिता दीदी ने स्थानीय ग्राम्य जीवन, रहन-सहन आदि को देखा, ग्रामीण स्त्री-पुरुषों से संवाद किया, उनके साथ भोजन किया।
