उदयपुर 5 दिसंबर , गीता विश्व प्रीति,रीति,नीति सिखाती हैं। संसार में भूतकाल का शोक, वर्तमान का मोह और भविष्य का भय प्रत्येक प्राणी को सताता रहता है। ऐसी संशय भय पूर्ण स्थिति में गीता हमे नवीन प्रकाश व समाधान देती है।
यह विचार गीताव्रती संतोष दीदी ने विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा उदयपुर द्वारा शुक्रवार को विद्या भवन पॉलिटेक्निक महाविद्यालय उदयपुर में आयोजित गीता जयंती प्रतीक उत्सव में व्यक्त किए।
संतोष दीदी ने कहा कि स्वस्थ रहकर प्रसन्नता से जीवन जीने की कला गीता बतलाती है । हमारे देश की आगामी ओर वर्तमान पीढ़ी को युगपुरुष विवेकानंद के जीवन को ध्यान में रखना होगा।
वे प्रतिदिन भगवदगीता में आए दूसरे अध्याय के सातवें शरणागति श्लोक से संशय पूर्ण स्थिति में गीता का आश्रय लेकर समस्या का समाधान खोजते थे।
उन्होंने कहा कि महामना मदन मोहन मालवीय गीता अध्ययन से एकाग्रता और संयम प्राप्त करते है।
विश्व कल्याण का यह ग्रंथ है विद्यार्थियों के लिए एवं शिक्षकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जिसके माध्यम से शिक्षक अपने विद्यार्थी को उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान कर सकते हैं हैं। चरित्रवान तकनीकी प्राध्यापक ही चरित्रवान तकनीकी विद्यार्थी का निर्माणकर्ता है ।
प्रारंभ में प्राचार्य डॉ अनिल मेहता ने अतिथियों स्वागत उद्बोधन दिया। तीन ओंकार प्रार्थना गीत एवं गीता के श्लोक का वाचन रमेश चंद्र कुम्हार ने किया, कृष्ण तुम्हारी गीता हम भी सुनना चाहे गीत का वाचन साक्षी प्रजापत ने किया। प्राध्यापक नितिन सनाढय ने विद्यार्थियों को गीता के अध्ययन एवं स्वाध्याय करने का संकल्प दिलवाया । कार्यक्रम में आकाशवाणी उद्घोषिका मीनाक्षी अग्रवाल, रघुवीर सिंह , राधा कृष्ण मेनारिया, जय शर्मा ने भी अपने विचार रखें। ।
अंत में रमेश चन्द्र कुम्हार ने अतिथियों को धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।
