मोटे अनाजों के प्रसंस्करण व उत्पादों से उद्यमिता विकास के सीखे गुर
उदयपुर, 9 सितम्बर। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित परियोजना “मेवाड़ क्षेत्र की पारंपरिक फसलों का उत्कृष्टता केंद्र” के तत्वावधान में मिलेट (मोटे अनाज) प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन विषय पर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रोजेक्ट प्रभारी डॉ कमला महाजनी ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों तथा युवाओं को मोटे अनाजों (जैसे रागी, बाजरा, कोदो, कुटकी आदि) के वैज्ञानिक उपयोग, प्रसंस्करण तकनीकों, और मूल्य संवर्धन के आधुनिक तरीकों की जानकारी देना है, जिससे वे स्थानीय स्तर पर उद्यमिता के नए अवसरों को पहचान सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
प्रशिक्षण सत्रों में यंग प्रोफेसनल योगिता पालीवाल ने मिलेट्स की पौष्टिकता, बाज़ार में इनकी बढ़ती मांग, प्रसंस्करण यंत्रों का संचालन, उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग तथा विपणन की तकनीकियों पर व्यावहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान किया गया। प्रतिभागियों ने मिलेट्स से तैयार होने वाले विविध उत्पादों जैसे कि मिलेट कुकीज़, बिस्किट, नमकीन, रेडी-टू-कुक मिक्स आदि के निर्माण की प्रक्रिया में भाग लिया।इस पहल के माध्यम से महिलाओं एवं युवाओं में स्थानीय संसाधनों के आधार पर लघु एवं कुटीर उद्योग स्थापित करने की प्रेरणा मिली, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास और पोषण सुरक्षा दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
प्रशिक्षण की प्रमुख गतिविधियां
सात दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को ज्वार, बाजरा, रागी, सांवा, कुटकी, कांगणी, चेना जैसे विविध मोटे अनाजों (मिलेट्स) की पहचान, उनके पोषण संबंधी गुण, और परंपरागत एवं आधुनिक उपयोगों की गहन जानकारी दी गई। विशेषज्ञ नेहा शेखावत ने प्रायोगिक जानकारी दी। इसमें फसलों को प्रसंस्करण के माध्यम से दलिया, पापड़, रेडी-टू-ईट स्नैक्स, और अन्य मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों में परिवर्तित किए जाने की प्रक्रिया बताई। डॉ अंजलि जुयाल ने एफएसएसएआई लाइसेंसिंग प्रक्रिया, बारकोडिंग, पोषण संबंधी लेबलिंग तथा विपणन रणनीतियों पर विशेष जोर दिया। प्रत्येक सत्र को व्यवहारिक अभ्यास के साथ इस प्रकार डिजाइन किया गया कि प्रतिभागी स्वयं अपने हाथों से उत्पाद निर्माण की विधियाँ सीख सकें। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को मिलेट बेस्ड कुकीज़, बिस्किट, लड्डू, नमकीन, इंस्टेंट मिक्स, और अन्य उत्पादों को बनाने की तकनीक सिखाई गई।
स्थानीय उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल प्रतिभागियों के ज्ञान एवं कौशल में वृद्धि का माध्यम बना, बल्कि उन्हें स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए प्रेरित भी किया। इसका उद्देश्य यह भी रहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं एवं युवा लघु एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा सकें।
