उदयपुर। न्यू भूपालपुरा में स्थित अरिहंत भवन में विराजित अरिहंत भवन में आचार्य प्रवर ज्ञानचंद महाराज ने आज की धर्म सभा में बोलते हुए कहा कि रिश्तों की अपनी उम्र होती है,कुछ मरने तक चलते हैं, कुछ जीते जी मर जाते हैं। आधुनिक युग के रिश्ते जीते जी भी चलते नजर नहीं आते हैं। सुबह रिश्ता कुछ और होता है शाम को कुछ और नजर आता है।
आए दिन तलाक तो होते ही रहते हैं। जहां खून के रिश्ते हैं, वहां भी भाई-भाई का दुश्मन बन जाता है। आज बस एक ही रिश्ता अधिक रह गया है, वो है दौलत का। दौलत के पीछे सारे रिश्ते फैल हो गए। कुछ ही रिश्ते हैं जो मृत्यु पर्यन्त चलते हैं। लेकिन शास्त्रीय दृष्टि से अच्छे और बुरे कार्यों में रिश्ते भव भव तक चलते हैं। यह बात जैन, बौद्ध, वेदांत सभी आस्तिक दर्शनों को मंजूर है। आप जिसके जान से प्यार थे या जिनको अपने जान से ज्यादा चाहते रहे हैं, वह कब बदल जाते हैं, पता नहीं चलता। इसलिए रिश्तो में उलझकर, किसी को अपना पराया समझना उचित नहीं होगा। मोह करने लायक कुछ नहीं है, मोह कर्म से उपलब्धि कुछ नहीं, वो केवल भटकता है। आज रोहिणी सेक्टर 11 के पदाधिकारियों का स्थानीय संघ द्वारा भव्य स्वागत किया गया। प्रवचन अरिष्टनेमी भगवान पर चला।
आधुनिक युग में रिश्तें सुबह-शाम बदलते रहते:आचार्य श्री ज्ञानेश
