म्हारा केसरिया नाथ रे, घणी रे खम्मे…
संबंध तय करते वक्त जिसका मोबाईल लॉक तो समझें कुछ है गड़़बड़़ःसुप्रकाशमति माताजी
उदयपुर। सकल जैन समाज की अग्रणी संस्था श्री मेवाड़ जैन युवा संस्थान द्वारा जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान का जन्म कल्याणक रविवार को उदयपुर में धूमधाम एवं हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया।
प्रवक्ता जिनेन्द्र वाणावत ने बताया कि इस अवसर पर शहर में एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जो टाउनहॉल से प्रारम्भ होकर शहर के विभिन्न मार्गाे से होती हुई मुखर्जी चौक स्थित पंचायती नोहरे पंहुच कर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। भव्य शोभायात्रा के स्वागत के लिये मार्ग में 14 स्वागत द्वार लगाये गये और 21 सामाजिक समरसता का संदेश देती हुई झांकियां शामिल हुई। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी शोभायात्रा में सैकड़ों समाजजन शामिल हुए जो बैंड बाजों की धुन के साथ म्हारा केसरिया नाथ रे,घणी रे खम्मा…,म्हारे संासो में समाया पारसनाथ रे.. जैसे भजनों पर नृत्य करते हुए चल रहे थे। विभिन्न महिला संगठनों द्वारा सजाई गई झांकियां सारे शहर में आकर्षण का केंद्र रही। शोभायात्रा में शामिल सैकड़ो लोगों के अलावा नगर निगम से लेकर पंचायती नोहरे तक सड़क के दोनों और खड़े सैकड़ो समाजजन एवं शहरवासियों ने शोभायात्रा का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। शोभा यात्रा नगर निगम से बाबू बाजार, देहलीगेट, मंडी और मुखर्जी चौक होते हुए पंचायती नोहरे में पहुंच कर धर्मसभा में परिवर्तित हो गयी। गर्मी को देखते हुए जगह-जगह श्रद्धालुओं को आइसक्रीम और ठंडे पेय बांटे गए एवं प्रभावना वितरीत की गई।
शोभा यात्रा में अपार जन समूह के मध्य श्रीजी के गजरथ के साथ मुनि-आर्यिका सुप्रकाशमति माताजी ससंघ एवं भारतेश्वरी माताजी चल रही थी। जिनका जगह-जगह समाजजन श्रद्धालु आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। नगर निगम से लेकर पंचायती नोहरे तक श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। श्रावक-श्राविका चतुर्विद संघ की उपस्थिति में अपूर्व उत्साह के साथ शोभा यात्रा पंचायती नोहरे में पहुंची।
.शोभायात्रा के समापन के बाद पंचायती नोहरे में आयोजित धर्म सभा में सुप्रकाशमति माताजी ने माता-पिताओं का आह्वान किया कि वह अपने बच्चों और खासकर लड़कियों पर अयान दें। हमे हमारी परंपरा के अनुसार ही पौषाक और वेशभूषा पहननी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समय था जब आदमी अपनी सैलरी नहीं बताता था और महिलाएं अपनी ज्वेलरी नहीं बताती थी लेकिन अब इसमें एक और चीज जुड़ गई है कि आजकल के युवक युवतियां अपने मोबाइल की गैलरी नहीं बताती है। बच्चे बच्चियों के संबंध करते वक्त आप यह ध्यान रखें कि अगर उनका मोबाइल लॉक है तो समझ लेना कि मामला कुछ गड़बड़ है। जिसके भी मोबाइल का लॉक नहीं है समझ लेना सब कुछ अच्छा है फिर आंख बंद करके अपने बच्चे या बच्ची की सगाई कर सकते हैं।
2017 से हर साल आदिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव उदयपुर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह तीसरा मौका है जब मैं भी इसमें शामिल हुई हूं। माताजी ने कहा कि अगर अपने जीवन को सफल बनाना है तो चार चीजों को छोड़ना पड़ेगा। जिनमे बेड लैंग्वेज, बेड लॉजिक, बेड लग्जरी और बेड साइट्स। सबसे पहले हमें गंदी भाषा का प्रयोग करना छोड़ना पड़ेगा। दूसरा जो गंदे विचार और गंदा लॉजिक जो हम जीवन में अपनाते हैं उसे त्यागना पड़ेगा। इसके साथ ही जो आजकल की बेड लग्जरी लाइफ है उससे छुटकारा पाना पड़ेगा।
भारतेश्वरी माताजी ने कहा कि जन्म कल्याणक तीर्थंकरों का ही मनाया जाता है। हमें तीर्थंकरों से प्रेरणा लेकर उनके बताएं मार्ग पर चलना चाहिए। लेकिन आज कितने लोग हैं जो उनके बताए मार्ग का अनुसरण करते हैं इस पर चिंतन मनन की आवश्यकता है।
धर्म सभा का प्रारंभ मंगलाचरण और मंगलदीप प्रज्वलन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन देते हुए निर्मल मालवी ने प्रथमेश के आयोजन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए सभी का आभार प्रकट किया कि इसके माध्यम से समाज एकजुट हो रहा है। ऐसे आयोजनों से ही समाज की एकजुटता बढ़ती है। उन्होंने खासकर महिला शक्ति का धन्यवाद दिया कि उनकी वजह से ही प्रथमेश 2025 का यह आयोजन इतना भव्य बन पाया।
शहर विधायक ताराचंद जैन ने कहा कि भगवान आदिनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव मानना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि पहले सभी यही जानते थे जैन धर्म भगवान महावीर स्वामी के ही देन है। लेकिन जब से इतने भव्य तरीके से प्रथमेश भगवान आदिनाथ का जन्म कल्याणक मनाया जाने लगा है तब से सभी को पता चला की जैन धर्म की शुरूआत भगवान आदिनाथ ने ही की थी। संगठन के संरक्षक पारस सिंघवी ने कहा कि 2017 से इस प्रथमेश की शुरुआत हुई थी और आज इसने इतना भव्य रूप ले लिया है यह आप सभी समाज जनों की इच्छा शक्ति और कार्य कुशलता का ही परिणाम है।
सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत ने कहा कि हम हमारे प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव मना रहे हैं। इतना विशाल जैन समूह यह प्रमाणित करता है कि हमारा जैन समाज आज एकजुट है इसमें और भी हमें एकजुटता दिखाने की आवश्यकता है तभी हमारा समाज और महान बन सकेगा। समारोह का संचालन संस्थान के महामंत्री डॉ राजेश देवड़ा ने किया। समारोह के अंत में धन्यवाद व आभार कार्याध्यक्ष से शांतिलाल गंगावत ने दिया
इस अवसर पर समारोह की अध्यक्षता गुलाबचंद कोटड़िया ने की। मुख्य अतिथि आदेश्वर वक्तावत, विशिष्ट अतिथि शान्तिलाल, रोशन कोटड़िया थे। श्वेतांबर समाज के अध्यक्ष प्रकाश कोठारी, महामंत्री आलोक पगारिया एवं वरिष्ठ समाजजन उपस्थित थे। इसके अलावा श्ंातिलाल वेलावत सहित सभी जैन समाजों के अध्यक्ष महेंद्र टाया, सेठ शांतिलाल गदावत, ऋषभ जसींगोत, लक्ष्मीलाल बोहरा, जानकराज सोनी, अशोक गोधा, दिनेश सोनी, रमेश वगेरिया, सुंदरलाल डागरिया, सुरेश पद्मावत, सुरेश पाटनी, दिनेश नागदा, शांतिलाल नागदा, योगेश अखावत, राजेश परतियोत, निर्मल मालवी शांतिलाल गंगावत,गौरव गनोड़िया,डॉ राजेश देवड़ा सहित करीब 5 हजार समाजजन एवं पदाधिकारी मौजूद थे।
