खेरवाड़ा, दिगंबर जैन आचार्य श्रेय सागर महाराज ने कहा कि मानव को धर्म व सद मार्ग गुरु ही बता सकता है ,अतः सदैव देव ,शास्त्र व गुरु के शरण व सानिध्य में रहते हुए अपरिग्रह और असंग्रह को अपने जीवन में जिए ।आचार्य श्री मंगलवार को स्थानीय शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सभागार में धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सदैव शुद्ध व सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए तथा होटल, रेस्टोरेंट, विवाह समारोह आदि के भोजन का त्याग करने का प्रयास करना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि भौतिक सुखों का कोई अंत नहीं है। हम लालसा में न उलझे जीवन के आवश्यक कार्यों और कर्तव्यों का पालन करें। सभी कार्य और कर्तव्य जीवन के देवदूत होते हैं, कर्तव्य को कर्तव्य की भावना से निष्ठा पूर्वक संपादित करना देवों की ही अर्चना है। आप सबल हैं, समर्थ हैं, सौभाग्यशाली हैं, इसलिए आपके पास जरूरत से ज्यादा अर्जित होता है। जो भोगोसे पूरा हुआ। जो बचा सो लुटा दिया। हमारे पास अतिरिक्त आता जाए ,उसे निस्वार्थ आनंद भाव से जगत की व्यवस्था में अपनी ओर से समर्पित करें। अपनी ओर से भरसक कोशिश रहे, सदा सत्यवानी बोले और सत्य का समर्थन करें ।हर व्यक्ति और हर परिस्थिति के प्रति समान दृष्टि रखें, निंदा, प्रशंसा, अमीरी गरीबी, हानि लाभ दोनों ही स्थितियों में समान रहे। यह कुदरत की व्यवस्था है कोई भी स्थिति एक जैसी नहीं रहती है ।धर्म सभा में स्थानीय दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष रमेश चंद्र कोठारी, महामंत्री भूपेंद्र कुमार जैन, पूर्व अध्यक्ष श्याम सुंदर कोठारी, पूर्व उपाध्यक्ष पारस जैन, कन्हैयालाल जैन, दिलीप सिंघवी, महिला परिषद अध्यक्ष शकुंतला कोठारी, पुलक महिला मंच संरक्षक किरण कोठारी सहित बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी उपस्थित थे। धर्म सभा का संचालन भूपेंद्र कुमार जैन ने किया।
मानव को सद् मार्ग गुरु ही बता सकता है : आचार्य श्रेय सागर
