उदयपुर। सुरजपोल बाहर स्थित दादाबाड़ी में श्री जैन श्वेताम्बर वासुपूज्य महाराज मन्दिर का ट्रस्ट द्वारा आयोजित किये जा रहे चातर्मास में समता मूर्ति साध्वी जयप्रभा की सुशिष्या साध्वी डॉ. संयम ज्योति ने कहा कि पुण्य हौज की तरह है। हौज से व्यक्ति पानी निकालता है तो हौज खाली होता है, फिर उसमे पानी भरना पड़ता है। धर्म कुएं की तरह है। कुएं मे कितना भी पानी निकालो, उसमे स्वतः ही पानी आता है।
साध्वी ने कहा कि सुख सुविधाए, स्वस्थ शरीर, अनुकूल धन वैभव सत्ता आदि सब पुण्य की देन है लेकिन पुण्य खत्म होते ही अनुकूलताएँ प्रतिकूलता में बदल जाती है। साध्वी ने कहा- जो परिवर्तन के नियम को स्वीकार कर लेता है वह किसी भी स्थिति में विचलित नहीं होता। उसके चेहरे की मुस्कराहट में कोई बदलाव नही आता यहाँ तक की भयंकर रोग की स्थिति में भी वह खिन्न नही होता। प्रसन्नता उसके चेहरे से झलकती है। प्रसन्नता का कारण धर्म को जीवन में जीना है, वही रोग का कारण कर्मसत्ता है।
साध्वी ने कहा- धर्म सत्ता व्यक्ति को निगेटीविटी को नेगलेक्ट करवाती है वही पॉजिटिविटी को सलेक्ट करवाती है। धन की हानि होने पर कर सोचता है जो हुआ अच्छा हुआ, सस्ते में निपटे। इससे अधिक भी हानि हो सकती थी, अरे धन की हानि हुई जन की तो नही हुई, धन की हानि की तो आज नही कल भरपायी से सकती है परंतु जन की हानि की भरपाई संभव नहीं। जन की हानि पर वह सोचता है संयोग का वियोग निश्चित है।
सुख सुविधाए, स्वस्थ शरीर, अनुकूल धन वैभव सत्ता सभी पुण्य की देनःसंयमज्योति
