उदयपुर। सेक्टर 4 श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी डॉ श्री संयमलताजी म. सा.,डॉ श्री अमितप्रज्ञाजी म. सा.,श्री कमलप्रज्ञाजी म. सा.,श्री सौरभप्रज्ञाजी म. सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में महासती संयमलता ने कहा कि भाग्य और पुरूषार्थ जीवन के दो पहलू है। इस दुनिया में जो कुछ भी मिलता है और मिलता वहंी है जो उसके भाग्य में लिखा होता है लेकिन मिलता हमेशा पुरूषार्थ से ही।
उन्होंने कहा कि रेखाओं से कभी भाग्य का निर्माण नहीं होता है। भाग्य का निर्माण पुरूषार्थ से ही होता है। उन्होंने कहा कि आज का पुरूषार्थ भविष्य के भाग्य का निर्माण करता है। सत्कर्म एवं सत् पुरूषार्थ से भाग्य सौभाग्य में बदल सकता है,तों वहीं बुरे कर्म से भाग्य दुर्भाग्य में बदल जाता है।
साध्वी कमलप्रज्ञाश्री ने कहा कि भगवान महावीर के अनेकान्तवाद दर्शन की घर-घर मंे आवश्यकता है। प्रभु महावीर की शैली हजार जीवन शैली बन जायें तो घर,परिवार समाज स्वर्ग बन सकता है। जीवन की प्रगति अणुबम से नहीं अणुव्रत से होती है। दुर्गा देवी मेहता ने 30 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किये। चातुर्मास समिति ने शॉल अभिनन्दन पत्र,एवं रजतश्रीफल भेंट कर तपस्वी का बहुमान किया। राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने साध्वीवृंद के दर्शन वंदन का लाभ लिया।
भाग्य का निर्माण हाथ की रेखाओं से नहीं पुरूषार्थ से होता:संयमलता
