जनु भाई की 27 वीं पुण्य तिथि पर किया नमन

भारतीय ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर शैक्षिक परिसवांद का हुआ आयोजन
मौलिकता और वैदिक ज्ञान से ही देवत्व की उत्पत्ति – प्रो सारंगदेवोत
 जनुभाई ने समाज के अंतिम छोर को मुख्यधारा से जोड़ा – प्रो सारंगदेवोत
सही संदर्भों का सही ज्ञान दे शिक्षक – प्रो. शुक्ला
डिग्री के लिए नहीं, जीवन के लिए हो शिक्षा – प्रो. दिव्य प्रभा नागर

उदयपुर 24 अगस्त / जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय के संस्थापक मनीषी पंडित जनार्दनराय नागर की 27वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार को प्रतापनगर स्थित आईटी सभागार में विद्यापीठ एवं जनार्दनराय नागर एज्युकेशनल डवलपमेंट चेरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में पुष्पांजलि, स्मरणांजलि एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विषय पर आयोजित परिसंवाद का शुभारंभ मुख्य वक्ता एमडीएस विवि अजमेर के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला, कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत, कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर, मुख्य अतिथि प्रफुल्ल नागर, प्रो. दिव्य प्रभा नागर, आशीष नागर, पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा, प्रो. एमपी सिंह ने मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्जवलित कर किया। इससे पूर्व सम्मानित अतिथि एवं विद्यापीठ के तीनों परिसरों के कार्यकर्ताओं ने प्रतापनगर परिसर में जनुभाई की आदकमद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।


प्रारंभ में कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि कौशल विकास, समुदाय से जुड़ाव, सामाजिक, सरोकार तथा संस्कृति का संरक्षण ऐसे भाव है, जो जनुभाई के शैक्षिक दर्शन के मूल है जिन्हें वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रमुखता से शामिल किया गया है। जनुभाई भारतीय ज्ञान परंपरा के पक्षधर रहे और उन्होंने सर्वधर्म समभाव को प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि जनुभाई ने समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने का अथक प्रयास किया। भारतीय ज्ञान परंपरा पर विचार व्यक्त करते हुए प्रो सारंगदेवोत ने कहा कि मौलिकता भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल में है। मौलिकता आत्मावलोकन की जिसमें शिक्षा और शिक्षा पद्वति दोनों द्वारा वेद वेदान्तों के ज्ञान, विद्याओं और कलाओं से परिपूर्ण होकर व्यक्ति मंे देवत्व की उत्पत्ति कर देता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने मैकाले नीति से आई खामियों को दूर करने के लिए मल्टी डिसीप्लिनरी अप्रोच को अपनाया है।
मुख्य वक्ता प्रो अनिल शुक्ला ने कहा कि भारतीय ज्ञान परपंरा का मूल ध्येय संस्कार, संस्कृत, ज्ञान व त्याग में निहित है जो राष्ट्रीय शिक्षा निति 2020 के द्वारा पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। भारतीय ज्ञान और विद्या में उच्च स्तरीय सम्प्रेषण के द्वारा प्रकृति के अंतर्नाद को सुन पाने की उत्कृष्ट क्षमता से अकाट्य ज्ञान की प्राप्ति होती है।

प्रो. शुक्ला ने कहा कि शिक्षा को बदलने का कार्य समाज का है तथा सही संदर्भाें का सही ज्ञान देना कार्य शिक्षकों का है और संशय व विनम्रता आदर्श शिष्यत्व के गुण हैं। भारतीय ज्ञान परंपारा तथा इन तथ्यों के माध्यम से राष्ट्र प्र्रगति का मार्ग प्रशस्त किया जा सकेगा।
पूर्व कुलपति प्रो. दिव्यप्रभा नागर ने कहा कि जनुभाई का मानना था कि शिक्षा जीवन के लिए दी जानी चाहिए, डिग्री के लिए नहीं और जब शिक्षा डिग्री के लिए होगी तो मनुष्यत्व की समाप्ति हो जाएगी। प्रो नागर ने जन्नूभाई की साहित्यिक कृतियों रामराज्य तथा शंकराचार्य के माध्यम से उनके शैक्षिक तथा आध्यात्मिक दर्शन को रेखांकित किया । उन्होंने कहा कि जन्नूभाई के भाव हमेशा समाज के प्रति कार्य करने तथा सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय के रहे।
विद्यापीठ के पूर्व कुल प्रमुख प्रफुल्ल नागर ने भी संस्था तथा कार्यकर्ताओं के भावों पर विचार रखें।
कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर ने जनुभाई और विद्यापीठ के संघर्षों को साझा करते हुए कार्यकर्ताओं से संस्था की विचारधारा को अक्षुण्ण रखने का आव्हान किया। आजादी के 10 वर्ष पूर्व विपरीत परिस्थितियों में संस्थान की स्थापना हुई जिसका इतिहास कार्यकर्ताओं को पढ़ना चाहिए। तीन रूपयों से शुरू संस्थान का आज 65 करोड़ का वार्षिक बजट है। संस्थापक जनुभाई, संस्थान में कार्य करने वाले व्यक्ति किसी भी पद पर कार्य कर रहा हो उसे कार्यकर्ता कहते थे।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, पुरूषोतम शर्मा, श्वेता नागर, परीक्षा नियंत्रक डॉ. पारस जैन, डॉ. भवानीपाल सिंह राठौड़, डॉ. युवराज सिंह, सुभाष बोहरा, डॉ. धमेन्द्र राजौरा, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. गजेन्द्र माथुर, प्रो. जीवन सिंह खरकवाल, प्रो. मलय पानेरी,  प्रो. मंजु मांडोत, डॉ. कला मुणेत, प्रो. सरोज गर्ग, डॉ. अमीया गोस्वामी,  डॉ. शेलेन्द्र मेहता, डॉ. अवनिश नागर,  डॉ. शैलेन्द्र मेहता, डॉ. हेमेन्द्र चौधरी, डॉ. हीना खान, डॉ.़ नीरू राठौड़, डॉ. रचना राठौड़, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. सुनिता मुर्डिया, डॉ. एसबी नागर, डॉ. दिलीप सिंह चौहान, डॉ. लालराम जाट, डॉ. प्रकाश धाकड़, डॉ. संजीव राजपुरोहित, आशीष नंदवाना, आरीफ, उमराव सिंह राणावत, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. गुणबाला आमेटा, डॉ. भुरालाल श्रीमाली, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव सहित विभिन्न विभागों के डीन डायरेक्टर्स, वरिष्ठ संकाय सदस्य, कार्यकर्ता, विद्यार्थी सहित शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरीश चौबीसा ने किया जबकि आभार प्रो. एमपी शर्मा ने जताया।

By Udaipurviews

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