उदयपुर, 10 अगस्त। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में चातुर्मास कर रहे पंन्यास प्रवर निरागरत्न जी म.सा. ने शनिवार को धर्मसभा में कहा कि मुझे क्या और मेरा क्या? ये मानसिकता आपको धर्मी तो नहीं बल्कि सच्चे माता-पिता, भाई-बहन और मित्र भी नहीं बनने देगी। आज दिन तक हमारा जो संसार परिभ्रमण हो रहा है और सुख-दुःख की जो अनुभूति हो रही है उसका एकमात्र कारण कर्म बंध है और कर्मबंध विपरीत मान्यता, मन-वचन-काया का अनकंट्रोल, कषाय और मन-वचन-काया का सदुपयोग और दुरूपयोग से होता है। आप किसी को सम्पत्ति नहीं दे सकते तो कोई बात नहीं, आश्वासन के दो शब्द, संवेदना, साथ या आपका समय तो दो। आपके दिए हुए समय से सामने वाला निराश न रहकर प्रसन्न बन जाएगा। दुनिया में चार तरह के लोग होते हैं पहला-मौका ढूंढने वाले, दूसरा-मौका झपट लेने वाले, तीसरा-मौकी उपेक्षा करने वाले और चौथा मौके पर ना बोलने वाला। हमारा नम्बर पहली श्रेणी में आना चाहिए। चातुर्मास प्रवक्ता राजेश जवेरिया ने बताया कि शनिवार को पंन्यास प्रवर ने नेमीनाथ भगवान के दीक्षा कल्याणक की सारगर्भित व्याख्या की। बाहर से दर्शनार्थियों के आने का क्रम निरन्तर बना हुआ है और त्याग-तपस्याओं की लड़ी लगी हुई है।
आप किसी को सम्पत्ति नहीं दे सकते तो कोई बात नहीं, लेकिन समय तो दो : निरागरत्न
