उदयपुर। साध्वी जयप्रभा की सुशिष्या साध्वी डॉ संयम ज्योति ने भीमंधर स्वामी भवयात्रा कराते हुए कहा कि आत्मा का स्वभाव उर्ध्वगमन करना है,पंरन्तु कर्माधीनता के कारण आत्मा अधोगमन कर रही है। पंाच कु यानि कुकर्म, कुकाल,कुनिमित्त,कुबुद्धि,और कुसंग इस आत्मा के पीछे पड़े हुए है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य योनि पुरूषार्थ की,साधना की योनि है। इस योनि मे ंप्रचंड पुरूषार्थ कर व्यक्ति बर्हियात्रा को समाप्त कर अर्न्तयात्रा द्वारा इन पंाच कु पर विजय प्राप्त कर आत्म सत्ता को कर्मसत्ता से समाप्त कर सकता है।
साध्वी संयम साक्षी सारगर्भित स्तवनो के माध्यम से सभी को भीमध्ंार स्वामी स्तवना करवायी। सोमवार को ओनेस्टी इन द बेस्ट पॉलिसी विषय पर प्रवचन होंगे।
मनुष्य योनि पुरूषार्थ व साधना की योनिःसाध्वी संयम ज्योति
