कोटड़ा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकार व विभाग कटिबद्ध

कोटड़ा ब्लॉक में 4106 संस्थागत प्रसव
उदयपुर, 30 जून। जिले के दूरस्थ जनजाति बहुल कोटड़ा क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए राज्य सरकार और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग कटिबद्ध है। कोटड़ा ब्लॉक में चालू वर्ष में 4106 संस्थागत प्रसव हुए हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ शंकर बामणिया ने बताया कि कोटड़ा ब्लॉक में संस्थागत प्रसव को लेकर  तथ्यात्मक जानकारी विभागीय उच्चाधिकारियों को प्रेषित की गई है। इसके मुताबिक कोटडा खण्ड में कुल 2297 संस्थागत प्रसव राजकीय चिकित्सा संस्थानों मे तथा 1809 संस्थागत प्रसव गैर सरकारी अस्पतालों मे लाईनलिस्ट हुए है तथा 2494 घरेलु प्रसव रिपोर्ट हुए हैं।
खण्ड क्षेत्र के समस्त राजकीय चिकित्सा संस्थानों में कुल 2297 प्रसव सम्पादित करवाये गये है तथा खण्ड के नजदीकी क्षेत्र सिरोही जिले के पिण्डवाडा आदि के निजी चिकित्सालयों में सक्षम परिवारों द्वारा प्रसव करवाये गये जो कि लाईनलिस्ट अनुसार कुल 1809 निजी / गैर सरकारी चिकित्सालयों के प्रसव है। इस प्रकार कुल संस्थागत प्रसव 4106 है जो कि लक्ष्य का 62.21 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि खण्ड कोटडा जिले का ही नही बल्कि राज्य का सबसे दूरस्थ, दुर्गम एवं अति पिछडा जनजाति जनसंख्या का खण्ड है। शिक्षा का काफी अभाव होने के साथ ही क्षेत्र की बसावट छितरी एवं पहाडियों पर बिखरी होने तथा सडक के अभाव एवं यातायात के साधनों की कमी से परिवहन की समस्या एवं विभाग में कार्मिकों के अभाव के कारण कुछ हद तक सेवाएं बाधित होती है। इस कारण खण्ड क्षेत्र में 2494 घरेलु प्रसव भी हुए हैं जो कि लक्ष्य का लगभग 37 प्रतिशत है। बामणिया ने बताया कि खण्ड क्षेत्र में वर्तमान में 75 उपस्वास्थ्य केन्द्र स्वीकृत है जिनमें से मात्र 39 उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर भवन उपलब्ध है जो भी काफी पुराने होने से अधिकतर जर्जर अवस्था में हैं। 35 उप स्वास्थ्य केन्द्र भवन विहीन हैं। प्रसाविकाओं के स्वीकृत 150 पदों में से 69 पद वर्तमान मे रिक्त हैं साथ ही खण्ड क्षेत्र में चिकित्सा अधिकारियों के स्वीकृत 17 पदों के विरूद्ध वर्तमान मे मात्र 10 चिकित्सक ही कार्यरत है। इनमे से भी 03 चिकित्सक यू.टी.बी. पर कार्यरत हैं उक्त के अतिरिक्त खण्ड क्षेत्र मे संचालित 2 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों यथा कोटडा एवं बेकरिया में से एक पर भी कोई विशेषज्ञ चिकित्सक (विशेष कर स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, निश्चेतन विशेषज्ञ) पदस्थापित नहीं है। इस कारण किसी भी प्रकार के जटिलता वाले प्रसवों को रेफर अथवा अन्य स्थानों पर ही सम्पादित करवाना मजबूरी हो जाता है। खण्ड क्षेत्र की स्थिति में सुधार के लिए खण्ड के समस्त चिकित्सा संस्थानों पर समुचित प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्ता होना सर्वप्रथम आवश्यक है, तत्पश्चात दूरस्थ एवं दुर्गम दृष्टि से बसे क्षेत्र को देखते हुए प्रत्येक प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर 10 अथवा 108 एम्ब्यूलेन्स की व्यवस्था करनी होगी तथा क्षेत्र के कुछ एक स्थानों का चयन किया जाना होगा जो पहुंच कि दृष्टि से कुछ सुगम हो एवं आसपास की समस्त गर्भवती महिलाओं को प्रसव हेतु वहां लाया जाना सम्भव हो एवं एवं उन उन स्थानों पर स्थानीय व्यवस्थाओं / सहयोग तथा स्वंयसेवी संस्थाओं / चिकित्सालयों के माध्यम से उन्हे प्रसव हेतु विकसित कर प्रसव सुविधा उपलब्ध कराने पर क्षेत्र मे संस्थागत प्रसवों को बढ़ाये जाने के प्रयास किये जा सकते है।
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By Udaipurviews

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