राग, रंग और उत्सव का पर्व है बसंत पंचमी – कर्नल प्रो. सारंगदेवोत
भारतीय संस्कृति, सभ्यता, परम्परा हमारी पहचान ……
उदयपुर 14 फरवरी / जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय के संघटक लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय एवं डबोक यूनिट की ओर से बुधवार को बसंत पंचती के पावन पर्व पर डबोक परिसर में स्थित मॉ सरस्वती मंदिर में ज्ञान की देवी सरस्वती की कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने पंडित डॉ. तिलकेश आमेटा के द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चना कर विद्या का वरदान मांगा। विद्यापीठ के डबोक परिसर में संस्थापक पं. नागर ने करीब 65 वर्ष पूर्व सरस्वती मंदिर का निर्माण करवाया था। इस अवसर पर प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि राग, रंग और उत्सव का पर्व है बसंत पंचमी, आज से ठीक 40 दिनों बाद रंगो पर्व होली का त्यौहार मनाया जायेगा। भारतीय संस्कृति, सभ्यता, परम्परा, तीज, त्यौहार हमारी पहचान है इन्हें संजोये रखने की जिम्मेदारी हम सभी की है। हमारे पर्वो को बढ़चढ कर मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बसंत ऋतुओं का राजा है और आज से ही हमारी दिनचर्या एवं दिनों के समय में परिवर्तन आ जाता है। माध माह की पंचमी पर यह पर्व मनाया जाता है। आज के दिन पीले वस्त्र पहनने चाहिएं, यह रंग उर्जा, ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। पीला रंग समृद्धि का सूचक है। वसंत पंचमी का हमारी संस्कृति से गहरा जुड़ाव है, इस ऋतु में प्रकृति खुद को संवारती है, कण-कण खिल उठता है, मनुष्य, पशु – पक्षी उल्लास से भर जाते है। भगवत गीता में श्री कृष्ण ने वसंत को अपना स्वरूप माना है। वसंत पंचमी को श्रीपंचमी भी कहा गया हैं। ऐसी मान्यता है कि श्री का प्रतीक माँ लक्ष्मी हैं और पंचमी को ही माँ सरस्वती का जन्म हुआ है।
निजी सचिव केके कुमावत ने बताया कि इस अवसर पर प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. गजेन्द्र माथुर, डॉ. रचना राठौड़, डॉ. अमिया गोस्वामी, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. सुनिता मुर्डिया, डॉ. बलिदान जैन, प्रो. आईजे माथुर, डॉ. राजन सूद, डॉ. लीली जैन, डॉ. संतोष लाम्बा, डॉ. अजितारानी, डॉ. रोहित कुमावत, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, सहित कार्यकर्ता एवं विद्यार्थी मौजूद थे।
समारोह का संचालन डॉ. रोहित कुमावत ने किया जबकि आभार प्रो. सरोज गर्ग ने जताया। इस अवसर पर सभी विद्यार्थी एवं कार्यकर्ता को प्रसाद एवं गन्ने का रस वितरित किया गया।
