उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से सिन्धी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने धर्म सभा में कहा कि जीवन में धर्म ध्यान और पुण्य की बड़ी महिमा होती है। जो मनुष्य गुरु के सानिध्य में रहकर धर्म ध्यान और प्रभु की आराधना करता है तो उसके पुण्य कर्मों का उदय भी जरूर होता है।
उस मनुष्य के जीवन में कभी भी किसी भी काम मे संकट या व्यवधान आता है तो उसके पुण्य कर्मों के कारण उनका असर उस पर नहीं होता है। जिस व्यक्ति का मन साफ है और बुद्धि में निर्मलता है, और जो गुरु की वाणी हमेशा अपने जीवन में उतरता है उसकी हमेशा जय जयकार होती है। पुण्य कर्म कभी भी व्यर्थ नहीं जाते हैं। समय आने पर उनका फल जरुर मिलता है। जीवन में मरना कोई नहीं चाहता। पृथ्वी पर रहने वाला हर जीव चाहे कीड़े मकोड़े सांप बिच्छू कोई भी हो नहीं मरना चाहते। अगर हम किसी पेड़ से एक पत्ता भी तोड़ते हैं तो वह भी खींचता है। वह भी पेड़ से अलग नहीं होना चाहता। फिर मनुष्य मरना चाहता है ऐसा तो हम सोच भी नहीं सकते,लेकिन चाहने नहीं चाहने से कुछ नहीं होता है मौत तो एक दिन आनी ही है।
अपने जीवन का अंत हो उसके पहले व्यक्ति को धर्म कार्य करने चाहिए। धर्मात्मा बनना चाहिए। पुण्य कार्य करके अपने जीवन में पुण्य कर्मों का उदय करना चाहिए।
मुनी श्री ने कहा कि कभी भी किसे भी बिना मांगे कोई भी सलाह नहीं देना चाहिए। अगर कोई हमसे सालह मांगता है तो ही हमें उसे कुछ भी कहना चाहिए। कई बार व्यक्ति एक दूसरे को बिना मांगे ही सलाह दे देता है। जबकि उसे नहीं पता होता है कि सामने वाली की परिस्थितियां क्या है।
धर्मसभा में अखिलेश मुनि ने सुंदर गीतिका प्रस्तुत की। महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मास काल से ही णमोकार महामंत्र की धर्म आराधना निरंतर जारी है। सोमवार को बाहर से आए अतिथियों का धर्म सभा में स्वागत अभिनंदन किया गया। धर्मसभा में मेवाड़ वागड़ क्षेत्र सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी है।
पुण्य कर्म कभी भी व्यर्थ नहीं जाते,समय आने पर मिलता है प्रतिफलःसुकनमुनि
