आयड़ जैन तीर्थ में अनवरत बह रही धर्म ज्ञान की गंगा
– साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की
उदयपुर 14 अक्टूबर। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में शनिवार को विविध आयोजन हुए। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे दोनों साध्वियों के सानिध्य में आरती, मंगल दीपक, सुबह सर्व औषधी से महाअभिषेक एवं अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई।
जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि विशेष महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा ने धूप पूजा के महत्व को बताते हुए कहा कि परमात्मा की धूप पूजा करते समय यह भावना आये कि है परमात्मा। ये धूप की घटाएँ जिस प्रकार ऊध्र्वगामी है वैसे ही मुझे ऊध्र्वगति और सिद्धशिला प्राप्त करती हैं। हे तारक! आप मेरी आत्मा के मिध्यात्व रूपी दुर्गन्ध को दूर कर शुद्ध आत्मस्वरूप प्रकट करने वाले हों। हे परमात्मा! अनन्त काल तक इस कर्म ने मुझे इस तरह कैद कर कर रखा था कि मैं आपका मुखकमल नहीं देख सका। आपकी पुण्यकृपा के प्रभाव से मेरा गाढ मिध्यात्व कुछ मंद बना और मुझे आपके पावन दर्शन मिले अब आप मुझ पर कृपा कीजिये और मेरी आत्मा में शेष रहे हुए मिथ्यात्व को दूर कीजिये, नाश कर दीजिए धूप पूजा के प्रभाव से, आपके प्रभाव से मेरी इच्छा पूर्ण होगी।
– धूप पूजा करते समय हमें इन बातों का ध्यान रखना है :
धूपपूजा गभारे में नहीं, रंग मंडप में प्रभु की बायी ओर खड़े रहकर की जाती है। धूप काठी को अनेक लोग भगवान की नाक के पास के जाने की चेष्ठा करते हैं जो उचित नहीं है। लकड़ी की काठी वाली अगरबत्ती धूप पूजा के योग्य नहीं है। धूपदानी की सफाई बराबर होनी चाहिए। धूप पूजा आदि समस्त द्रव्यपूजा स्वद्रव्य से करनी चाहिए। मंदिर में रखा धूप जल रहा हो तो नयी धूपबत्ती जलाना आवश्यक नहीं है। धूप के धुओं के कारण मंदिर के दरवाजों की चौखट, घुम्मट आदि में कालापन आ जाता है. इसलिए प्रतिदिन ऐसे स्थानों, पर गीले कपड़े से शुद्धि कर लेनी चाहिए।
चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर पर्युषण महापर्व के तहत प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।
परमात्मा की धूप पूजा करके अपनी आत्मा को ऊध्र्वगति प्राप्त कराएं : साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री
