– पांच दिवसीय पंचान्ह्विका महोत्सव का समापन आज
– आयड़ जैन तीर्थ में अनवरत बह रही धर्म ज्ञान की गंगा
उदयपुर 09 अक्टूबर। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में सोमवार को पांच दिवसीय पंचान्ह्विका महोत्सव के चौथे दिन विविध आयोजन हुए । महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ में पांच दिवसीय महोत्सव के तहत प्रात: 9.15 बजे चौथे दिन अभय-सरोज, खुशी, अमित-आयुषी, रिधान, निवार्ण संकट निवारक रोक-शोक निवारक श्रद्धि-सिद्धि समृद्धि प्रदाता श्री सिद्धचक्र महापूजन कर महातपस्वी मुनिराज अनेकांत विजय का 53वां पुण्य दिवस धूमधाम से मनाया गया। जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि विशेष महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में श्री सिद्धचक्र की महिमा शास्त्रकार भगवंत ने अपरंपार बताई है। सिद्धचक्र की आराधना के द्वारा हमें सिद्ध बनना है, कर्मचक्र को काटना है । जिसके से ध्यान समस्त कार्य सिद्ध हो, जिसकी आराधना से अनन्तानन्त आत्माएँ सिद्धि गति को प्राप्त हुई हैं वह सिद्धचक्र कहलाता है। इसे नवपद भी कहते है। इस नवपद से नौ बीज की प्राप्ति होती है। अरिहंत की आराधना से समाधि की प्राप्ति, सिद्ध की आराधना से संयम की प्राप्ति, आचार्य की आराधना से सदाचार की प्राप्ति, उपाध्याय की आराधना से विनय की प्राप्ति, साधु की आराधना से साधना की प्राप्ति, सम्यग् दर्शन की आराधना से श्रद्ध की प्राप्ति, सम्यग् ज्ञान की आराधना से प्रकाश की प्राप्ति, सम्यग् चारित्र की आराधना से आचरण की प्राप्ति, सम्यग्र तप की आराधना से शुद्धि की प्राप्ति- अंत में उसका फक्त मोक्ष मार्ग है। ऐसे महिमावत श्री सिद्धचक का महापूजन अत्यंत भावों के साथ सम्पन्न हुआ।
चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर पांच दिवसीय पंचान्ह्विका महोत्सव के तहत मंगलवार को अंतिम दिन कल पंचम दिवस परमात्म भक्ति के स्वरूप में श्री सतरह भेदी पूजा का आयोजन होगा और भक्ति के स्वरूप में पंजाब केशरी गुरु युगवीर जैनाचार्य श्री मद् विजय वल्लभ सूरीश्वर जी म. सा. का 69 वाँ पुण्यदिवस उनके उपकारों का स्मरण करके मनाया जायेगा। गुरु वल्लभ की मूर्ति के आगे 69 दीपक प्रगटीकरण करके एवं 69 पुष्प अर्पण करके तथा पुष्पहार पहना कर संक्रांति भजन द्वारा कार्यक्रम की शुभ शुरूआत की जायेगी। प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।
भक्तिमय वातावरण से श्री सिद्धचक्र महा पूजन सम्पन्न
