उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से सिंधी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने चातुर्मास के अवसर पर प्रातःकालीन धर्म सभा में कहा कि कभी-कभी अयोग्य को ज्ञान और शिक्षा देना विनाश का कारण बन जाता है। शिक्षा और ज्ञान वही देना उचित होता है जहां सामने वाला योग्य हो। अगर अयोग्य को शिक्षा और ज्ञान देंगे तो वह उसका दुरुपयोग भी कर सकता है। ऐसा होने पर वह व्यक्ति खुद का तो नुकसान करता ही है वह औरों के लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है।
उन्होंने कहा कि हमें कुछ भी कार्य करने से पहले अपनी भावनाओं को शुद्ध करना चाहिए। साथ ही सामने वाले की भावना को भी समझना चाहिए। धर्म ध्यान और आराधना कभी भी भौतिक अभिलाषाओं के साथ नहीं करनी चाहिए। कई लोग इन्हीं अभिलाषाओं को पूर्ण करते-करते अपना जीवन और धर्म आराधना का फल भी खत्म कर देते हैं।
मुनि श्री ने कहा कि धर्म आराधना और तप उनकी विधि और क्रियायो के साथ करने चाहिए। धर्म साधना और उनकी क्रियाओं का ज्ञान गुरु सानिध्य में ही प्राप्त हो सकता है। हमारे धर्म साधना के लिए ऐसे कई चमत्कारिक ग्रंथ भी उपलब्ध है और थे लेकिन समय के साथ वह विलुप्त भी होते गए। क्योंकि कई लोगों ने इनसे चमत्कारी ज्ञान प्राप्त कर दुनिया में उनका गलत उपयोग करना प्रारंभ कर दिया। इन चमत्कारिक ज्ञान से वह अपनी भौतिक अभिलाषाओं को पूर्ण करने का उपक्रम करने में लग गए। जबकि ऐसे ज्ञान का उपयोग लोक कल्याणकारी कार्यों में होना चाहिए। भगवान के वचनों को हमेशा श्रद्धा और भाव पूर्वक सुनकर उन्हें लोक कल्याण में उपयोग करना चाहिए।
उप प्रवर्तक अमृतमुनि श्री ने कहा कि बड़ा काम करने के लिए हमेशा अपनी सोच को भी बड़ा रखनी चाहिए। अगर छोटी सोच लेकर हम काम करेंगे तो वह कार्य भी छोटा ही होगा।उस कार्य में उतनी विशालता और विराटता नहीं आ पाएगी। हमेशा जीवन में यह सोच के चलें कि जैसे हम हैं वैसा ही सामने वाले को समझे। दूसरे के सहयोग और उनकी भलाई में ही अपने जीवन का कल्याण है। अपने जीवन को सफल बनाने और अपना जीवन निर्माण करने के लिए हमेशा सोच में परिवर्तन करते रहें और निरंतर नया सोचें। जहां उत्तर प्रत्युत्तर ज्यादा होते हैं वहां विवाद की संभावना हमेशा बनी रहती है। अगर समता भाव हमारे जीवन में आता है तो हम वाद विवाद से बच सकते हैं। डॉ. वरूण मुनि ने कहा कि जिनके पास बहुत कुछ है दूसरों के जीवन कल्याण के लिए कार्य करने चाहिए। दुनिया में ऐसे अनाथ बच्चे भी है जिनके आगे पीछे कोई नहीं है। उनका जीवन निर्माण करना भी हमारा धर्म और कर्तव्य बनता है।
धर्मसभा का संचालन करते हुए एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मासकाल में धर्म आराधना अनवरत जारी है। शुक्रवार को भी धर्म सभा में मेवाड़ वागड़ सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावकश्राविकाए पहुंचे जिन्होंने संतों का दर्शन लाभ लेने के साथ ही उनका आशीर्वाद लिया। संघ की ओर से धर्म सभा में उनका बहुमान भी किया गया।
कभी-कभी अयोग्य को ज्ञान और शिक्षा देना विनाश का कारण बनताःसुकनमुनि
