उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से सिंधी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने चातुर्मास के अवसर पर प्रातः कालीन धर्म सभा में कहां कि आगम की वाणी भगवान महावीर की वाणी है। इस वाणी को सुनने मात्र से कई कई लोगों का कल्याण हो गया है। इस वाणी से कई लोगों ने अपनी आत्मा को शुद्ध किया है और आत्म ज्ञान प्राप्त किया है। संसार में जितनी भी वस्तुए हैं, जितने भी जीव हैं उनमें से कोई भी शाश्वत नहीं है।
सभी संसार में अल्पकालिक है। यह जीवन छोटा सा है। इसे ऐसे ही नहीं गवाएं। जितनी हो सके धर्म आराधना करें, तप करें, ध्यान करें और प्रभु की वाणी सुनकर अपना जीवन सफल करें। भगवान महावीर की वाणी हमें संदेश देती है कि अगर हम जीवन में हार गए, इस जीवन में धर्म तप साधना इन सब चीजों से अगर दूर रहे तो हमारा कल्याण होने वाला नहीं है। यह मानव जीवन हमें एक बार मिला है। दोबारा यह जीवन नहीं मिलने वाला है। इसलिए जब भी समय मिले हमें प्रभु की आराधना और महावीर की वाणी को सुनने में उसे लगाना चाहिए।
उप प्रवर्तक अमृत मुनि श्री ने कहा कि भगवान का सानिध्य मिलने से हमारे भीतर के सारे कषाय दूर हो जाते हैं और हमारा जीवन शांत और निर्मलता को प्राप्त होता है। जीवन में क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। जब मनुष्य को क्रोध आता है उसे पता नहीं लगता कि वह क्या कर रहा है और अगले पल वह क्या करने वाला है। क्रोधी मनुष्य को उपदेश देने का भी कोई फायदा नहीं होता है। न हीं क्रोध के समय व्यक्ति को कोई शिक्षा ही दी जा सकती है। जब चूल्हे पर रखा तवा गर्म होता है उस दौरान अगर उसे पर पानी की कुछ बूंदें डाल दी जाए तो वह बुलबुला बनकर अपने ऊपर ही आती है। कई बार उन बुलबुलों के गर्म छींटे हमें नुकसान भी दे देते हैं। ठीक उसी तरह क्रोधी मनुष्य इस तवे के बुलबुले के समान होता है जिसे आप उपदेश भी देने जाओगे तो वह खुद के साथ आपका भी नुकसान कर सकता है। इसलिए जबपरेशान तो तभी उसे उपदेश सुनना चाहिए। क्रोध मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा दुश्मन है। क्रोध और कषायों जैसे विकारों से बचने के लिए हमें धर्म ध्यान और प्रभु की वाणी सुनना चाहिए। जिससे हमारे भीतर उठने वाले या कषाय शांत हो सके और हमारा जीवन निर्मल बन सकें। इस अवसर पर डॉ. वरूण मुनि ने भी धर्मसभा को संबोधित किया।
जीवन में धर्म तप साधना से दूर रहें तो जीवन का नहीं होगा कल्याणःःसुकनमुनि
