स्थानीय निकायों की लापरवाही, अदूरदर्शिता व मिलीभगत से नष्ट हो रहे छोटे तालाब

छोटे तालाब नही बचे तो मुश्किल होगा सूखे, अकाल व बाढ़ से बचना
उदयपुर, 9 छोटे तालाब एक के बाद एक खुर्दबुर्द हो रहे हैं । झील प्रेमियों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है । रविवार को आयोजित झील संवाद मे झील संरक्षण समिति के डॉ अनिल मेहता ने कहा कि जिला परिषदों, निगमों, नगर पालिकाओं, नगर विकास प्रन्यासों जैसे स्थानीय निकायों की लापरवाही , अदूरदर्शिता व मिलीभगत से छोटे तालाब पाटे जा रहे हैं । उन पर भवन निर्माण हो रहे हैं । तालाबों को आघात पंहुचाने वालों तथा उन्हे खुर्दबुर्द करने वालों के पक्ष मे पूरी सरकारी लॉबी आ खड़ी होती है । इसे रोका नही गया तो सूखे, अकाल व बाढ़ से पीड़ित होना पड़ेगा ।

झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य
तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि बडी झीलों के साथ ही छोटे तालाब बाढ नियंत्रण मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । वे बरसाती जल को जमीन मे पंहुचा कर भूमिगत जल भंडार तैयार करते हैं । इनमे मिट्टी भर इनका मूल स्वरूप नष्ट करना अवैध व गैर कानूनी है ।

गांधी मानव कल्याण समिति के निदेशक नंद किशोर शर्मा ने कहा कि छोटे तालाब जैव विविधता के स्रोत हैं । वे अनेक पशु, पक्षियों, जलीय जीवों के आश्रय स्थल है । यदि छोटे तालाब नही रहे तो जैव विविधता संकट मे पड़ जायेगी । पर्यावरणविद कुशल रावल ने कहा कि राजस्व दस्तावेजों मे हेरा फेरी कर तालाबों की भूमि को गैर पेटा घोषित करवा लिया जाता है । यह षड्यंत्र गाँव गाँव तक हो रहा है । झील प्रेमी द्रूपद सिंह ने सरकार से आग्रह किया कि वो सभी तालाबों का सीमांकन करवाएं ताकि इन तालाबों की भूमि व जल भराव क्षेत्र को बचाया जा सके । संवाद से पूर्व झील स्वच्छता श्रमदान किया गया ।

By Udaipurviews

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