देवेंद्रधाम में गुरु पुष्कर जयंती सप्ताह पर सामूहिक ध्यान साधना का हुआ आयोजन
उदयपुर। महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन देते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने वाणी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मधुर वाणी अमृत के समान है, जबकि कटुक वाणी जहर के समान होती है। हमारे खानदान और कुल की पहचान कहने भर से नहीं, बल्कि हमारी वाणी से ही स्वतः हो जाती है। वाणी के प्रभाव से ही व्यक्ति के मित्र बनते हैं और असावधानी से शत्रु भी तैयार हो जाते हैं, इसलिए जीवन में वाणी-विवेक का होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि रूप, रंग और जाति तो जन्मना (जन्म से) प्राप्त होते हैं, परंतु वाणी कर्मणा होती हैकृअर्थात व्यक्ति अपनी वाणी और बोलचाल में सुधार करने में पूरी तरह सक्षम है। शरीर के सबसे कोमल अंगों में जिह्वा (जीभ) सर्वप्रथम आती है। कठोर होने के कारण दांत बाद में आते हैं और पहले गिर जाते हैं, लेकिन जिह्वा अंत तक साथ निभाती है। एक मीठा शब्द किसी को दिल में बसा देता है, वहीं एक कड़वा शब्द दिल से उतार देता है। अतः मनुष्य को हमेशा अपने शब्दों को हृदय रूपी तराजू में तौलकर ही बोलना चाहिए।
गुरु पुष्कर जन्म जयंती सप्ताह के अंतर्गत आज भक्तामर पाठ के साथ सामूहिक आत्म ध्यान साधना का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि जिस प्रकार तलवार की पहचान उसकी धार से होती है, उसी प्रकार इंसान की कीमत और पहचान उसके व्यवहार से आंकी जाती है।
उन्होंने सीख देते हुए कहा कि व्यक्ति को न केवल बाहरी लोगों के साथ, बल्कि अपने परिवार के साथ भी मधुर और आत्मीय व्यवहार करना चाहिए। हमें दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने की आदत डालनी चाहिए, न कि किसी का उपहास उड़ाने की। जीवन ऐसा हो कि हम किसी के घर में स्नेह के दीपक जलाएं, न कि किसी का दिल दुखाएं। विनम्रता और मधुर वाणी ही जीवन का सच्चा विवेक है। श्रीसंघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन एवं महामंत्री हिम्मत बड़ाला ने बताया कि कार्यक्रम के समापन पर समाज द्वारा बाहर से पधारे आगंतुक समाजसेवियों का अभिनंदन किया गया।
वाणी की मधुरता ही जीवन की सच्ची पहचानःडॉ. सुरेन्द्र मुनि
