–संसार धोखे की खान, मात्र आमोद-प्रमोद नहीं बल्कि तप, जप और परोपकार से जीवन बनाएं सार्थकःडॉ. सुरेन्द्र मुनि
उदयपुर। महावीर समवशरण में धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवर्तक डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने संसार के स्वरूप की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि संसरति इति संसारःअर्थात जहाँ जीव का आवागमन एक गति से दूसरी गति (मानव, देव, तिर्यंच और नरक) में निरंतर बना रहता है और जीवात्मा एक स्थान पर स्थिर नहीं रह पाती, वही संसार है। जिस प्रकार एक माली पौधे को इधर से उधर लगाता और निकालता रहता है, उसी प्रकार कर्मों के प्रभाव से जीव विभिन्न गतियों में भटकता रहता है।
मुनिजी ने कहा कि यह संसार धोखे की खान है जहाँ कदम-कदम पर धोखा है। जिस व्यक्ति को गाड़ी की तरह जिंदगी को सावधानीपूर्वक चलाना आता है, वही इस जीवन यात्रा को कुशलता से पार कर पाता है; असावधानी बरतने पर हर पल दुर्घटना (एक्सीडेंट) का खतरा बना रहता है।
उन्होंने आगे कहा कि संसार किसी के लिए मीठा तो किसी के लिए कड़वा प्रतीत होता है। आत्मा अपने-अपने शुभ-अशुभ कर्मों के अनुसार ही फल पाती है और कर्म विपाक दोनों रूपों में प्रकट होते हैं। इसलिए मनुष्य जीवन का ध्येय केवल आमोद-प्रमोद तक सीमित न रखकर तप, जप, साधना, दया, पुण्य और परोपकार के जरिए जीवन को सार्थक बनाना होना चाहिए। इस दौरान मुनिजी ने श्श्रीपाल रासश् का वर्णन करते हुए कर्म लीला का विस्तार से बोध कराया।
गुरु पुष्कर जयंती सप्ताह के अंतर्गत आज द्वितीय दिवस सामूहिक सामायिक दिवस का आयोजन किया गया जिसमें सैंकडों लोगों ने सामायिक व्रत की आराधना संपन्न की सामायिक व्रत आराधकों को में से लकी ड्रा द्वारा पारितोषिक वितरण किया गया ।
सभा के प्रारंभ में भक्तामर स्तोत्र की विधि-विधान से प्रार्थना की गई । संघ द्वारा अतिथि सेवा का लाभ लिया गया। पुष्कर जयंती के उपलक्ष्य में 20 अक्टूबर को प्रातःकालीन प्रवचन सत्र में सामूहिक ध्यान साधना का विशेष आयोजन रखा गया है।
देवेंद्र धाम में आज गुरु पुष्कर जयंती सप्ताह के अंतर्गत आज द्वितीय दिवस सामायिक दिवस
