उदयपुर 3.10.2026| महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर के पेंशनर्स की लंबे समय से चली आ रही पेंशन समस्या के स्थायी समाधान के लिए विश्वविद्यालय की भूमि के जनहित में उपयोग की एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसके अंतर्गत बोहरा गणेशजी मंदिर एवं दुर्गा नर्सरी क्षेत्र के निकट स्थित विश्वविद्यालय की संबंधित भूमि का उपयोग शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करने तथा उससे प्राप्त होने वाली राशि से पेंशनर्स के लिए एक पृथक, सुरक्षित और स्थायी पेंशन कॉर्पस फंड स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इस संबंध में MPUAT के पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर शर्मा, अखिल राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष इंजीनियर वीरेंद्र सिंह सोलंकी, पेंशनर वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार भटनागर, गणेशलाल पालीवाल, कोमल सिंह राठौड़, देवी लाल तेली एवं रामेश्वर प्रसाद शर्मा ने उदयपुर विधायक ताराचंद जैन, नगर निगम महापौर पारस सिंहवी एवं उपमहापौर दिनेश भट्ट से मुलाकात कर उन्हें पेंशनर्स की गंभीर वित्तीय स्थिति, प्रस्तावित समाधान और संबंधित दस्तावेजों से अवगत कराया एवं राज्य सरकार, उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA), नगर निगम एवं संबंधित विभागों के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई और प्रभावी पैरवी करने का आग्रह किया, ताकि शहर की यातायात समस्या के समाधान के साथ-साथ पेंशनर्स को नियमित एवं सम्मानजनक पेंशन उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
अखिल राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष इंजीनियर वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने वर्ष 2013 में शासन सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के कार्यवाही विवरण में दर्ज प्रस्ताव संख्या 4 एवं 5 की ओर जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया। इन प्रस्तावों में उदयपुर शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय क्षेत्र से जुड़ी सड़कों के विस्तार एवं विकास पर विचार किया गया था। प्रस्ताव संख्या 4 में कॉलेज क्षेत्र एवं दुर्गा नर्सरी रोड से संबंधित सड़क के विस्तार का विषय शामिल था, जबकि प्रस्ताव संख्या 5 में विश्वविद्यालय गेट से बोहरा गणेशजी होते हुए प्रतापनगर बाइपास तक 80 फीट चौड़ी सड़क विकसित करने का प्रस्ताव दर्ज था। बैठक के कार्यवाही विवरण में इन सड़कों की आवश्यकता, यातायात सुधार और विश्वविद्यालय की भूमि से जुड़े पहलुओं पर विचार किए जाने का उल्लेख है।
पेंशनर वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार भटनागर ने सुझाव दिया कि बोहरा गणेशजी मंदिर एवं दुर्गा नर्सरी के निकट स्थित संबंधित विश्वविद्यालय भूमि के सार्वजनिक उपयोग, नियमानुसार अधिग्रहण, हस्तांतरण अथवा अन्य उपयुक्त वैधानिक व्यवस्था की संभावनाओं का परीक्षण किया जाए। इस प्रक्रिया में विश्वविद्यालय के हितों, भूमि के स्वामित्व, कानूनी स्थिति, उचित मूल्यांकन और संबंधित विभागों की स्वीकृतियों को प्राथमिकता दी जाए। प्रस्ताव के अनुसार, यदि भूमि के जनहित में उपयोग से विश्वविद्यालय को राशि प्राप्त होती है, तो उसे पेंशनर्स के लिए पृथक एवं सुरक्षित स्थायी पेंशन कॉर्पस फंड में निवेश करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इस कॉर्पस की मूल राशि को सुरक्षित रखते हुए निवेश से प्राप्त आय का उपयोग पेंशन भुगतान में सहायता के लिए किया जा सकता है। इससे पेंशन व्यवस्था को दीर्घकालिक वित्तीय आधार देने और विश्वविद्यालय पर पड़ने वाले वित्तीय दबाव को कम करने की संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
MPUAT के पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर शर्मा का कहना है कि वर्ष 2013 में दर्ज इन प्रस्तावों की वर्तमान शहरी आवश्यकताओं के अनुरूप समीक्षा कर उन्हें आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उदयपुर में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए इन क्षेत्रों में सड़क विस्तार एवं विकास की संभावनाओं का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण किया जाना आवश्यक है। इससे संबंधित क्षेत्रों में यातायात को व्यवस्थित करने, आवागमन को सुगम बनाने और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य उदयपुर शहर की यातायात संबंधी जरूरतों और MPUAT पेंशनर्स की दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा के बीच एक व्यावहारिक समन्वय स्थापित करना है। यदि संबंधित भूमि के उपयोग की कानूनी, तकनीकी एवं वित्तीय संभावनाएं अनुकूल पाई जाती हैं, तो इससे एक ओर सड़क विकास और यातायात सुधार को गति मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर पेंशनर्स के लिए स्थायी वित्तीय आधार तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। वर्ष 2013 की उच्चस्तरीय बैठक में दर्ज प्रस्तावों की वर्तमान प्रासंगिकता का परीक्षण कर इस पहल पर समन्वित एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से विचार किया जाए। भूमि की कानूनी स्थिति, मूल्यांकन, विभागीय स्वीकृतियों और वित्तीय व्यवहार्यता की आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उचित निर्णय लिया जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने उदयपुर विधायक ताराचंद जैन, नगर निगम महापौर पारस सिंहवी एवं उपमहापौर दिनेश भट्ट से मुलाकात कर उन्हें पेंशनर्स की वर्तमान स्थिति तथा प्रस्तावित समाधान से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए। प्रतिनिधिमंडल ने वर्ष 2013 की उच्चस्तरीय बैठक के कार्यवाही विवरण में दर्ज प्रस्ताव संख्या 4 एवं 5 के आधार पर विषय को राज्य सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाने का आग्रह किया एवं जनप्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि वे इस मामले में राज्य सरकार, उदयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, विश्वविद्यालय प्रशासन तथा संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कराने में सहयोग करें। साथ ही, बोहरा गणेशजी एवं दुर्गा नर्सरी क्षेत्र की यातायात समस्या के समाधान के लिए आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ाने की पहल करें। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, तीनों जनप्रतिनिधियों ने सहयोग का आश्वासन देते हुए इस विषय को संबंधित स्तर पर रखने और आवश्यक प्रयास करने की बात कही।
स्थायी पेंशन समाधान के लिए प्रमुख प्रस्ताव
- वर्ष 2013 के प्रस्तावों की समीक्षा एवं क्रियान्वयन: उच्चस्तरीय बैठक के कार्यवाही विवरण में दर्ज प्रस्ताव संख्या 4 एवं 5 की वर्तमान शहरी आवश्यकताओं, तकनीकी पहलुओं और वैधानिक स्थिति के अनुसार समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
- भूमि का जनहित में उपयोग: बोहरा गणेशजी मंदिर एवं दुर्गा नर्सरी के निकट स्थित संबंधित विश्वविद्यालय भूमि के सार्वजनिक उपयोग, अधिग्रहण, हस्तांतरण अथवा अन्य वैधानिक विकल्पों की संभावनाओं का परीक्षण किया जाए।
- स्थायी पेंशन कॉर्पस फंड: भूमि से प्राप्त होने वाली संभावित राशि को पेंशनर्स के लिए पृथक एवं सुरक्षित कॉर्पस फंड में रखने की व्यवस्था विकसित की जाए।
- निवेश आय से पेंशन भुगतान: कॉर्पस की मूल राशि को सुरक्षित रखते हुए निवेश से प्राप्त आय के आधार पर पेंशन भुगतान में सहायता देने का दीर्घकालिक वित्तीय मॉडल बनाया जाए।
- पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन: भूमि मूल्यांकन, कानूनी परीक्षण, वित्तीय मॉडलिंग, निवेश नीति, लेखा-परीक्षण और निगरानी के लिए स्पष्ट संस्थागत तंत्र स्थापित किया जाए।
- विभागीय समन्वय: राज्य सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन, UDA, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रस्ताव पर आवश्यक निर्णय लिए जाएं।
प्रतिनिधिमंडल में पेंशनर वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार भटनागर, अखिल राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष इंजीनियर वीरेंद्र सिंह सोलंकी, MPUAT के पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर शर्मा, गणेशलाल पालीवाल, कोमल सिंह राठौड़, देवी लाल तेली एवं रामेश्वर प्रसाद शर्मा शामिल रहे।
