भक्ति से भगवान तक पहुंचने का मार्ग दिखाता है जिन शासनःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में शनिवार को आयोजित नियमित व्याख्यान में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जन्म-जन्मांतर के पुण्य के उदय से मनुष्य को जिन शासन की प्राप्ति होती है। यह शासन अद्भुत और विशिष्ट है, जो साधना के माध्यम से आत्मा को परमात्मा बनने का मार्ग दिखाता है। भक्ति करते-करते भक्त स्वयं भगवान के स्वरूप को प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का जीवन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। जिस आत्मा ने सातवीं नरक तक की यात्रा की, वही कठोर साधना और कर्मों के क्षय से तीर्थंकर महावीर बनी। उन्होंने कहा कि परमात्मा आदिनाथ ने पहले ही महावीर के भविष्य की घोषणा कर दी थी। एक ओर सांसारिक मोह था, दूसरी ओर साधना का मार्ग, लेकिन महावीर की साधना सदैव सर्वाेपरि रही। मां के आंसुओं के बीच भी आदिनाथ भगवान ने संयम स्वीकार किया।
साध्वी ने भरत चक्रवर्ती और माता मरुदेवी के प्रसंग से त्याग की महत्ता समझाई। उन्होंने कहा कि साधु संसार की दृष्टि से अकिंचन होते हैं, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से वही सबसे अधिक समृद्ध होते हैं।
उन्होंने कहा कि स्वार्थ के लिए दूसरों का अहित करने, उन्हें उन्नति के मार्ग से रोकने और नुकसान पहुंचाने वाला व्यक्ति मानव शरीर में होते हुए भी मानवता के मूल्यों से दूर हो जाता है।
इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्तिमय गीत प्रस्तुत किए।
जिन शासन की साधना से आत्मा बन सकती है परमात्मा
