-गोवा में पकडे गए उदयपुर जिले के 7 बच्चे, तमिलनाडू ले जा रहे थे
-रेस्क्यू कर उदयपुर लाया गया, बाल कल्याण समिति ने किए इंतजाम
-कुछ बच्चे पहले से ही तमिलनाडू पहुंचा दिए गए, गिरोह षड़यंत्र पूर्वक कर रहा काम
उदयपुर। सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कथित ईसाई मिशनरियों व एक सुगठित इकोसिस्टम द्वारा शिक्षा की आड में बच्चों को राजस्थान से बाहर ले जाने और फिर उनका धर्मान्तरण करने के मामलों की रचना बहुस्तरीय व डिजिटल लेन-देन की संभावना को देखते हुए एनआईए, सीबीआई और इंटेलिजेंस ब्यूरो आईबी से जांच करवाने की मांग की है।
विगत दिनों छत्तीसगढ़ राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीटीआई जैसे मंच व कानुवाड़ा थाना रिषभदेव के प्रकरण में चर्चित आनलाईन पैसों के विस्तृत लेनदेन को देखते हुए इसी अनुरूप गहन जांच की मांग की है।
सांसद डॉ रावत ने कहा कि उदयपुर संभाग के कई क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियां का सुनियोजित इकोसिस्टम, आदिवासी और गरीब जरुरतमंद लोगों का कथित मदद व प्रलोभन देकर सुनियोजित अवैध धर्मान्तरण की रचना चला रही है। ऐसे 15 से ज्यादा मामले मुख्यतः कानुवाड़ा-उदयपुर, बिछीवाड़ा- डूंगरपुर और कलिंजरा-बांसवाडा में ध्यान में आ चुके हैं। अब कथित ईसाई मिशनरियों के खिलाफ जागरुक आम लोग उठ खडे हुए हैं तो इन्होंने अपना मिशन का तरीका बदल दिया है। अब ये लोगों को राजस्थान से बाहर ले जाकर धर्मान्तरण की सुनियोजित रचना चला रहे हैं। ऐसा ही बच्चों के साथ कर रहे हैं। उदयपुर के 7 बच्चों को तमिलनाडू में स्कूल में भर्ती करवाने के नाम पर ले जा रहे लोगों को गोवा में पकड लिया गया है। इनमें 2 लडकियां और 5 लडके हैं। गोवा में एक साथ 7 बच्चों को देखकर किसी ने रेलवे पुलिस को सूचना दे दी, जहां से गोवा की बाल कल्याण समिति को जानकारी दी गई। उदयपुर से ये बच्चे बस से अहमदाबाद व वहां से रेल द्वारा गोवा पहुंचे थे।
सांसद डॉ रावत ने बताया कि गोवा की बाल कल्याण समिति ने उदयपुर में बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष यशोदा पणियां को सूचना दी जिस पर उन्होंने यहां से फोन पर पूरी जानकारी लेकर बच्चों को वापस लाने टीम भेजी। उदयपुर से पुलिस जाब्ते के साथ टीम गोवा गई जो शनिवार को उदयपुर पहुंची है। यशोदा पणियां से बच्चों से भी चर्चा की। पता चला कि ये बच्चे झाडोल तहसील के विभिन्न गांवों के है और 7 से 12 साल तक के हैं। ये झाडोल में भी चर्च में जाते थे, ऐसा बच्चों ने बताया। बताया गया कि जहां इन गरीब बच्चों को पढ़ाई के नाम पर ले जाया जा रहा है, वहां पहले से ही उदयपुर के कुछ बच्चे हैं जिनमें से 15 की संख्या तो सामने आ चुकी है। इससे क्षेत्र में आक्रोश फैलने की संभावना बताई है।
सांसद डॉ रावत ने बताया कि उदयपुर आने के बाद इन बच्चों, परिजनों व ग्रामीणों से भी जानकारी ली जानी चाहिए। इनके परिजनों को भी बुलवाया जा रहा है और बाल कल्याण समिति व पुलिस द्वारा संपूर्ण व गहन पडताल के बाद बच्चों को उनके परिजनों को सौंपा जाएगा।
सांसद डॉ रावत ने बताया कि उदयपुर संभाग में शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार हेतु सरकार की जीरामजी जैसी सभी योजनाओं के संचालन के बावजूद खासकर आदिवासी इलाकों में ईसाई मिशनरियां व उनका इकोसिस्टम, आम लोगों को विविध लालच देकर और भ्रमित करके धर्मान्तरण के काम में संलग्न होने की सूचना है। स्थानीय स्तर पर हो हल्ला नहीं हो इसलिए ये अब राजस्थान से बाहर अपने अड्डे बना रहे हैं। बच्चों को शिक्षा देने के बहाने वहां लेकर धीमा परंतु पूरी तरह संस्कृति से पृथक कर अल्पसंख्यक बनाने का काम किया जाएगा।
सांसद डॉ रावत ने केंद्रीय गृह मंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल कार्रवाई करवाने हेतु एसआईटी गठित करने तथा जांच सीबीआई, एनआइए व आईबी से करवाने की मांग की है, ताकि धर्मान्तरण में लगे पाकिस्तान व नेपाल से कथित संचालित अन्तर्राष्ट्रीय एवं पंजाब, छत्तीसगढ़, झारखंड व तमिलनाडू जैसे राज्यों से संचालित अन्तराज्यीय गिरोह, उनके समर्थक एनजीओज़, राजनीतिक संगठनों का पर्दाफाश हो सके व आदिवासी समाज की सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा करते हुए विकसित भारत हेतु विकास की यात्रा अनवरत व निर्बाध बनाई जा सके।
विश्व हिन्दू परिषद की टीम भी पहुंची: शिक्षा के नाम पर बच्चों को राजस्थान से बाहर ले जाने की सूचना पर विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत मंत्री सुंदरजी कटारिया ने भी संपूर्ण जानकारी ली और परिषद के कार्यकर्ता करण राजपुरोहित व अन्य बाल कल्याण समिति भी पहुंचे जहां उन्होंने घटनाक्रम की जानकारी लेकर उच्चाधिकारियों को दी।
शिक्षा के नाम पर बच्चों को राजस्थान से बाहर ले जाकर धर्मान्तरण कर रहा गिरोह, सांसद रावत ने एसआईटी गठित करने व एनआईए, सीबीआई-आईबी जांच की मांग की
